By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Swatva Samachar
Notification
  • Home
  • देश-विदेश
  • राज्य
  • राजपाट
  • खेल-कूद
  • मनोरंजन
  • अपराध
  • अर्थ
  • अवसर
  • आप्रवासी मंच
    • बिहारी समाज
  • मंथन
  • वायरल
  • विचार
  • शिक्षा
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
  • E-Magazine
Font ResizerAa
Swatva SamacharSwatva Samachar
  • देश-विदेश
  • राजपाट
  • खेल-कूद
  • मनोरंजन
  • अपराध
  • अर्थ
  • अवसर
  • आप्रवासी मंच
  • बिहारी समाज
  • मंथन
  • वायरल
  • विचार
  • शिक्षा
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Search
  • About us
  • Advertisement
  • Editorial Policy
  • Grievance Report
  • Privacy Policy
  • Terms of use
  • Feedback
  • Contact us
Follow US
मनोरंजन

धर ही धुरंधर, भारत भाव का शुभंकर

नैरेटिव के स्तर पर 70 साल से चले रहे मिथ्याप्रचार को एक धुरंधर ने ध्वस्त कर दिया है। साथ ही इस फिल्म ने विवेक अग्निहोत्री व कामख्या सिंह जैसों के लिए भी सीख छोड़ी है कि लोग महज इसलिए किसी फिल्म को देखने सिनेमाघर नहीं आएंगे कि वह. . . . .

Prashant Ranjan
Last updated: April 9, 2026 5:41 pm
By Prashant Ranjan 2.8k Views
Share
9 Min Read
SHARE

प्रशांत रंजन

सिनेमा उद्योग में सफलता का कोई तय सूत्र नहीं है। फिर भी विश्व की तमाम अति लोकप्रिय व सफल फिल्मों में एक बात समान होती है— इमोशन। इसी से पब्लिक कनेक्ट होता है और लोग अधीर होकर शीघ्र से शीघ्र फिल्म देख लेना चाहते हैं। जिस फिल्म को देखते हुए दर्शक स्वयं को फ्रेम के अंदर पाए, उस फिल्म को हर हाल में सफल होना है। हाल में आई आदित्य धर की धुरंधर उपर्युक्त बातों के लिए आदर्श उदाहरण है।

- Advertisement -

विश्व भर में राष्ट्रप्रेम पर फिल्में बनाना देश विशेष के सिनेउद्योग के लिए लाभप्रद विषय है। अमेरिका इसका आदर्श उदाहरण है। भारत में देशभक्ति फिल्में बनाने तथा उन्हें चाव के साथ देखने की परंपरा रही है। हालांकि, नई सदी में स्पाई यूनिवर्स के नाम पर देशभक्ति फिल्मों की आड़ में जो छद्म नरेटिव परोसा जा रहा था, उसे आदित्य धर की धुरंधर ने न केवल ध्वस्त किया है, बल्कि इस वर्ग के फिल्म निर्माण के लिए नई रेखा खींच दी है। भारत के गुप्तचर सैनिकों पर फिल्में पहले भी बनती रही हैं। लेकिन, धुरंधर ने कैनवस विस्तार करने के साथ—साथ नए राजनीतिक विमर्श को भी जन्म दिया है।

जसकिरत सिंह रंगी उर्फ हमजा अली (रणवीर सिंह) भारतीय गुप्तचर है, जो पड़ोसी मुल्क में जाकर आतंकियों को चिन्हित कर उनका समूल नाश करता है और ऐसा करने के लिए वह अजय सन्याल (रंगनाथन माधवन) द्वारा प्रशिक्षित किया जाता है। इस एक लाइन की कहानी में सिनेमाई प्राण फूंकने के लिए आदित्य धर ने दर्जनभर पात्रों की रचना की और पूरी तल्लीनता से कथा के प्रमेय, परिवेश, पात्र आदि को फिल्माने लगे। पात्रों के परिधान से लेकर ल्यारी कस्बे का चित्रांकन तक में धर महोदय ने स्वयं को झोंक दिया। लगभग आधे भाग को दिसंबर और शेष आधे भाग को इस वर्ष मार्च में रिलीज किया गया। लगभग साढ़े तीन घंटे लंबे दोनों भागों को अध्यायवार बांटा गया है, ताकि दर्शकों को पर्दे पर चल रहे वर्तमान कथा का संदर्भ ज्ञात रहे। स्पष्टता के लिए हर अध्याय को एक शीर्षक तले परोसा गया है और ये शीर्षक वेबसीरीजों की तरह बेतुके नहीं हैं, बल्कि शीर्षक के इर्दगिर्द ही वह अध्याय घटित होता है।

पटकथा समेकित दृष्टि से गति को धारण की हुई प्रतीत होती है। लेकिन, कई दृश्य अधिक लंबे हैं, जिस कारण कहीं—कहीं पटकथा में किंचित ठहराव आता है। इसको लेकर फिल्मकार ने साक्षात्कारों में बताया भी है कि पटकथा में जिन दृश्यों को महज कुछ सेकेंड के मॉन्टाज़ में दिखाना है, वे दृश्य दो—तीन मिनट लंबे हो गए और तीन मिनट की लंबाई वाले लिखे गए दृश्य 8 मिनट तक विस्तारित हो गए। यही कारण रहा कि शूटिंग के बाद जब एडिटिंग पूरी हुई तो धर महोदय के सामने लगभग आठ घंटे का मसाला तैयार पड़ा था। इसलिए इसे दो भागों में कुछ महीनों के अंतराल पर रिलीज किया गया।

- Advertisement -

इतनी लंबाई के बावजूद दर्शक धैर्य रखते हैं। इसके लिए फिल्मकार ने विशेष जतन किए हैं। प्रत्येक प्रमुख पात्रों के आकर्षक इन्ट्रो बनाए गए हैं और एक ठोस पृष्ठभूमि वाला कथानक रचा गया है। इन सारे पात्रों को हमजा के किरदार से संबंद्ध किया गया है। इसलिए दर्जनभर बड़े किरदार होने के बावजूद कथा बिखरी हुई नहीं लगती है और लंबाई के बावजूद दर्शक ऊबते नहीं हैं। निर्माताओं ने बंबइया निर्माण संस्कृति के विपरीत फिल्म के लेखन को बहुत महत्व दिया है। यही इसकी सफलता का सूत्र भी है। कथानक के ढांचे की रचना ऐसी है कि इसकी अंतर्धारा बहुपरतीय एवं संश्लिष्ट है, वहीं बाह्यधारा सरल रूप में विश्लिष्ट है। कथा का सूत्र वेबसीरीज एवं फीचर फिल्म के सांचों के मध्य आवाजाही करता है। इसलिए दर्शक का ध्यान भटकता नहीं। यह सूत्र लंबी कहानी को साधने के लिए आवश्यक था। प्रयोग सफल रहा।

सिनेमा में केवल कहानी नहीं होती, बल्कि उसका सिनेमाई प्रस्तुतीकरण महत्वपूर्ण होता है। फिल्मकार ने सिंध प्रांत के ल्यारी कस्बे को जीवंत करने के लिए थाईलैंड में ऐसा सेट बनाया कि वास्तविक लगे। उसके बाद पात्रों के लिए कलाकारों का चयन ऐसा रहा जो वास्तविकता की झलक दे। भारत के तत्कालीन रक्षामंत्री से लेकर जरदारी, नवाज शरीफ व अतीक अहमद तक के चित्रण के लिए कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा व उनकी टोली ने निष्ठावान प्रयत्न किए। अजय सान्याल (माधवन), रहमान डकैत (अक्षय खन्ना), एसपी असलम चौधरी (संजय दत्त), मेजर इकबाल (अर्जुन रामपाल), जमील जमाली (राकेश बेदी) व दाउद इब्राहिम के किरदारों के लिए सटीक पात्रों का चयन पर फिर उनकी रूपसज्जा पर जो परिश्रम हुआ है, वह सराहनीय है। केवल एक दृश्य में यामी गौतम धर की झलक दर्शकों के लिए एडऑन बोनस है।

- Advertisement -

पूरी फिल्म में परिस्थिति के अनुसार सत्तर व अस्सी के दशक के हिंदी फिल्मों के गाने पार्श्व में बजते हैं। मजे की बात है कि हत्या व फाइट जैसे दृश्यों में पार्श्व से बज रहे रूमानी गाने बेमेल नहीं लगते, बल्कि दर्शकों को दृश्य में गोता लगवाने में मदद करते हैं। हिंदी सिनेमा में यह अ​भिनव प्रयोग है। क्लाइमेक्स के बाद क्रेडिट टाइटल रॉल होने तक कहानी चल रही है और दर्शक कुर्सी से उठ नहीं रहे हैं, यह फिल्मकार के कौशल के लिए एक बड़ा प्रमाणपत्र है।

पूरी फिल्म में सबसे नाजुक, सूक्ष्म व मार्मिक क्षण है जसकीरत के अपने गांव वाला दृश्य। वह गांव लौटकर अपने पुराने घर व उसमें अपनी मां—बहन को देखता है। लेकिन, घर में प्रवेश नहीं करता। क्यों? वह अपने साथ इतने बोझ लाया है कि पांव आगे बढ़ नहीं पाते। बीच रास्ते में ठहरकर पीछे मुड़कर देखकर देखता है। अतीत की कड़वी यादों का बोझ, सीमा पार से ढोकर लाए गए नई यादों का बोझ। कहां रखेगा वह? उस घर में पहाड़ सरीखे बोझ के लिए जगह कहां होगी भला! वैसे भी वह जसकीरत से हमजा बन चुका है। पुराने जसकीरत के वजूद की पुनर्रचना कर। जब पुराना जसकीरत ही नहीं रहा, तो पुराना घर किस काम का? जख्मी अतीत भूलकर जीवन में आगे बढ़ चली बूढ़ी मां को फिर से क्यों अतीत में ले जाना? घर में प्रवेश करना हमजा की दुनिया को हमेशा के लिए जमींदोज कर देने जैसा होगा। ऐसे कई प्रश्नों के उधेड़बुन में फंसा जसकीरत बीच रास्ते पर खड़ा है, जहां फिल्म खत्म होती है। यह दार्शनिक दृश्य है, जिसमें हमारे होने के दर्शन को फिल्मकार ने महीन धागे से सिलाई—बुनाई की है।

धर ने धुरंधर के माध्यम से हिंदी सिनेमा का मानक ऊंचा कर दिया है। अब हर बड़ी फिल्म को धुरंधर से बड़ी बनने की चुनौती होगी। नैरेटिव के स्तर पर 70 साल से चले रहे मिथ्याप्रचार को एक धुरंधर ने ध्वस्त कर दिया है। साथ ही इस फिल्म ने विवेक अग्निहोत्री व कामख्या सिंह जैसों के लिए भी सीख छोड़ी है कि लोग महज इसलिए किसी फिल्म को देखने सिनेमाघर नहीं आएंगे कि वह राष्ट्रहित पर बनी है, बल्कि लोगों को थियेटर तक लाने के लिए फिल्म में वह सिनेमापन होना चाहिए, जो धुरंधर में है। हजारों रूपए के टिकट खरीदकर लोग उपदेश सुनने थियेटर में नहीं आएंगे। विषय कितना भी समाज या देशहित में जरूरी हो, लेकिन दर्शक मूल रूप से फिल्म का आनंद लेने सिनेमाघर में जाते हैं। हां, ​यह फिल्मकार की समझदारी होनी चाहिए कि वह आदित्य धर की भांति विशुद्ध मनोरंजन की चाशनी में सूक्ष्म रूप से उपदेश/संदेश का तड़का लगा दे। इस फिल्म में कलाकारों की भले ही कितनी भी प्रशंसा हो जाए। लेकिन, सबसे बड़ी बात यही है कि धर ही धुरंधर है।

TAGGED: Aditya Dhar, Dhurandhar, Hindi film, धुरंधर
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn Telegram Copy Link
Did like the post ?
Love1
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
By Prashant Ranjan
Follow:
Hello, I am prashant Ranjan
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमने पुरानी ख़बरों को आर्काइव में डाल दिया है, पुरानी खबरों को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कर। Read old news on Archive

Live News

- Advertisement -

Latest News

सहरसा में भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन: प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने का किया आह्वान
लेटेस्ट न्यूज़
महुआ महोत्सव का भव्य शुभारंभ, मंत्री संजय सिंह ने कहा— जल्द साकार होगा रेलवे लाइन का सपना
बिहारी समाज
बिहार के गरिमापूर्ण इतिहास को नए दृष्टिकोण से टटोलती है मृत्युंजय दुबे की नई पुस्तक ‘बिहारी गौरव’
बिहारी समाज विचार
रोहिणी, X पोस्ट, नीतीश, दिल्ली यात्रा, भुगतना पड़ा, चाचा जी, लालू, बेटी, तंज, AI कार्टून
‘भुगतना पड़ गया ना चाचा जी’….नीतीश के द‍िल्‍ली जाने पर लालू की बेटी रोहिणी का तंज
देश-विदेश राजनीति राजपाट वायरल
- Advertisement -

Like us on facebook

Subscribe our Channel

Popular Post

सहरसा में भाजपा कार्यकर्ता सम्मेलन: प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कार्यकर्ताओं से संगठन मजबूत करने का किया आह्वान
लेटेस्ट न्यूज़
महुआ महोत्सव का भव्य शुभारंभ, मंत्री संजय सिंह ने कहा— जल्द साकार होगा रेलवे लाइन का सपना
बिहारी समाज
बिहार के गरिमापूर्ण इतिहास को नए दृष्टिकोण से टटोलती है मृत्युंजय दुबे की नई पुस्तक ‘बिहारी गौरव’
बिहारी समाज विचार
रोहिणी, X पोस्ट, नीतीश, दिल्ली यात्रा, भुगतना पड़ा, चाचा जी, लालू, बेटी, तंज, AI कार्टून
‘भुगतना पड़ गया ना चाचा जी’….नीतीश के द‍िल्‍ली जाने पर लालू की बेटी रोहिणी का तंज
देश-विदेश राजनीति राजपाट वायरल
- Advertisement -
- Advertisement -

Related Stories

Uncover the stories that related to the post!
खेसारी, कल्पना, लाठीचार्ज, हंगामा, शो, वैशाली, मुजफ्फरपुर, 3 जवान, जख्मी, बवाल
देश-विदेश

भोजपुरी स्‍टार खेसारी लाल और कल्पना पटोवारी के कार्यक्रमों में बवाल, तोड़फोड़ व लाठीचार्ज…3 जवान जख्मी

वैशाली और मुजफ्फपुर में आयोज‍ित भोजपुरी के स्टार गायकों खेसारी लाल यादव…

By Amit Dubey
मनोरंजन

दि केरल स्टोरी2: कटघरे में लव जिहाद

प्रशांत रंजन दि केरल स्टोरी2 अपने शीर्षक के अनुरूप लवजिहाद की उसी…

By Prashant Ranjan
एक्ट्रेस, पवन सिंह, अंजलि राघव, गलत तरीका, छुआ, महिला आयोग, नोटिस, वीडियो, वायरल, लखनऊ शो
देश-विदेश

एक्ट्रेस को मंच पर गलत तरीके से छुआ…नए झमेले में फंसे पवन सिंह, नोटिस…2 अप्रैल को सुनवाई

भोजपुरी इंडस्ट्री के पावर स्टार पवन सिंह एक बार फिर अपनी हरकतों…

By Amit Dubey
मनोरंजन

दर्शकों से सौ प्रतिशत समर्पण मांगती है ‘अस्सी’

प्रशांत रंजन सिने माध्यम की सार्थकता इस बात में सर्वाधिक है कि…

By Swatva Desk
Show More
- Advertisement -

About us

पत्रकारों द्वारा प्रामाणिक पत्रकारिता हमारा लक्ष्य | लोकचेतना जागरण से लोकसत्ता के सामर्थ्य को स्थापित करना हमारा ध्येय | सूचना के साथ, ज्ञान के लिए, गरिमा से युक्त |

Contact us: [email protected]

Facebook Twitter Youtube Whatsapp
Company
  • About us
  • Feedback
  • Advertisement
  • Contact us
More Info
  • Editorial Policy
  • Grievance Report
  • Privacy Policy
  • Terms of use

Sign Up For Free

Subscribe to our newsletter and don't miss out on our programs, webinars and trainings.

[mc4wp_form]

©. 2020-2024. Swatva Samachar. All Rights Reserved.

Website Designed by Cotlas.

adbanner
AdBlock Detected
Our site is an advertising supported site. Please whitelist to support our site.
Okay, I'll Whitelist
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?