पटना: आधी सदी से अधिक समय तक हिंदी सिनेमा में पार्श्वगायन के क्षेत्र में आशा भोसले एक ऐसा नाम है जिसके बिना हिंदी सिनेमा संगीत का इतिहास अधूरा है। लेकिन आशा ताई के विराट व्यक्तित्व का रोचक पहलू यह है कि उन्होंने भोजपुरी फिल्मी संगीत को भी अपनी जादुई आवाज से एक बड़ा विस्तार दिया।
उक्त बातें सिने सोसाइटी पटना के पूर्व अध्यक्ष और जानेमाने फिल्म विश्लेषक प्रो. जय देव ने कहीं। वे रविवार को सिने सोसाइटी पटना द्वारा आयोजित आशा भोसले के श्रद्धांजलि कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन सांस्कृतिक संस्था दालान के सभागार में किया गया था। उन्होंने आशा भोसले द्वारा गाए गए भोजपुरी गीतों जैसे अंगूरी में डसले बिया नगिनिया, गोरकी पतरकी रे, बड़ा जतन से पिंजरा बनवले, पटना के बाबू जबनियां संभारऽ आदि की चर्चा की और उसे जमाने में उन गानों की लोकप्रियता की स्थिति का वर्णन किया।
इससे पूर्व श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान आशा भोसले द्वारा गाए गए भोजपुरी गीतों का दृश्यश्रव्य प्रदर्शन हुआ, जिन्हें देखकर उपस्थित सिनेमा और संगीत प्रेमी आशा ताई के प्रति भावुक हो गए। कार्यक्रम का संचालन कर रहे सिने सोसाइटी पटना के सह सचिव फिल्मकार प्रशांत रंजन ने बताया कि आजकल सिने सोसाइटी का स्वर्ण जयंती वर्ष चल रहा है और सारे छोटे-बड़े कार्यक्रम इस कड़ी में किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर दालान के संस्थापक प्रशांत रवि, फिल्म समीक्षक डॉ. कुमार विमलेंदु सिंह, अभिनेता नीरज कृष्ण, फिल्म इतिहासकार प्रो. एनएन पांडेय, अजय झा, वेद प्रकाश समेत सिने सोसाइटी पटना के कई सदस्य, फिल्म व संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।