पटना: बिहार में फिल्म निर्माण को उद्योग का दर्जा देने और नवोदित प्रतिभाओं को संस्थागत समर्थन देने की मांग को लेकर पाटलिपुत्र सिने सोसाइटी का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी से उनके कार्यालय में मिला। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को एक 17 सूत्री विस्तृत ज्ञापन सौंपकर वर्तमान फिल्म नीति में व्यापक संशोधन की मांग की।
सिनेमाघर, एफटीआईआई और सेंसर बोर्ड पर ध्यान:
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य की जो वर्तमान फिल्म नीति है, उसमें मुख्य रूप से पर्यटन की दृष्टि से फिल्मों की शूटिंग का परमिशन दिया जा रहा है, जबकि बिहार में फिल्म उद्योग को स्थायी रूप से खड़ा करने के लिए यहां बनी फिल्मों का प्रदर्शन सबसे बड़ी आवश्यकता है। ज्ञापन में कहा गया कि फिल्म सिटी की स्थापना से अधिक जरूरी बिहार में बंद और जर्जर हो चुके सिनेमाघरों का पुनरुद्धार करना है। इसके अतिरिक्त बिहार में एफटीआईआई, पुणे और सेंसर बोर्ड के शाखा कार्यालय में खुलना चाहिए, ताकि राज्य में सिने उद्योग को गति मिले।
नवोदित फिल्मकारों के लिए नीति:
वर्तमान फिल्म नीति के अधिकांश प्रावधान स्थापित फिल्मकारों के लिए उपयुक्त हैं। नवोदित फिल्मकारों को स्क्रिप्ट लेखन, निर्माण, प्रशिक्षण और अनुदान के लिए विशेष प्रावधानों और नए संशोधनों की जरूरत है। बिहार में अत्यंत अल्प संसाधन में नई फिल्में बन रही हैं। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि इन फिल्मों के वितरण, विपणन और प्रदर्शन के लिए बिहार सरकार को अभिभावक की भूमिका में आना चाहिए। इसके लिए राज्य स्तरीय फिल्म वितरण मंच और सरकारी स्क्रीनिंग नीति बनाई जाए।
मंत्री ने दिया आश्वासन:
कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार फिल्म उद्योग के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ज्ञापन में उठाए गए सभी मुद्दों की विभागीय स्तर पर शीघ्र समीक्षा की जाएगी और बिहार राज्य तथा यहां के नवोदित फिल्मकारों के हित में सकारात्मक निर्णय लिए जाएंगे। इस भेंट के दौरान बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की महाप्रबंधक रुबी ने फिल्म निगम की वर्तमान गतिविधियों की जानकारी दी।
मंत्री को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में जानेमाने फिल्म विश्लेषक प्रो. जय देव, पाटलिपुत्र सिने सोसाइटी के अध्यक्ष आनंद प्रकाश नारायण सिंह, सचिव अभिषेक कुमार, संयोजक प्रशांत रंजन और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम शामिल थे।