बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इसके लिए वह 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाएंगे। शपथ ग्रहण पश्चात नीतीश कुमार 13 अप्रैल के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। सूत्रों के हवाले से इस जानकारी के मिलने के बाद बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा सदस्य बनते ही नीतीश कुमार देश के उन गिने-चुने नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो जाएंगे, जिन्हें संसद और राज्य विधानमंडल के चारों सदनों (विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा) का सदस्य होने का गौरव प्राप्त है।
संसदीय सफर का नया पड़ाव
विदित हो कि नीतीश कुमार बीते 16 मार्च को निर्विरोध राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उच्च सदन में जाने की प्रक्रिया के तहत उन्होंने 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। अब 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण के साथ ही उनका राज्यसभा का आधिकारिक कार्यकाल भी शुरू हो जाएगा। नीतीश कुमार से पहले बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव, उपेंद्र कुशवाहा और दिवंगत सुशील कुमार मोदी ही ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने चारों सदनों के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। नीतीश ने अभी 30 मार्च को ही विधान परिषद की सीट छोड़ी थी। 2006 से वे लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उनके इस्तीफे की चर्चा तेज हो गई थी।
केंद्र और राज्य में अहम पद
नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले, जहां उन्होंने रेलवे में सुधार किए। 2005 से वे बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने कई चर्चित योजनाएं लागू कीं, जैसे शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनके मुख्यमंत्री पद को लेकर उठ रहा है। चूंकि उन्होंने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है, ऐसे में तकनीकी रूप से वह फिलहाल बिहार के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुसार, कोई भी व्यक्ति राज्य के किसी सदन का सदस्य रहे बिना अधिकतम 6 महीने तक मुख्यमंत्री या मंत्री के पद पर बना रह सकता है।
जेड प्लस श्रेणी की मिलेगी सुरक्षा
इधर मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा दिये जाने की खबर है। गृह विभाग की विशेष शाखा ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि उन्हें बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा मिलेगी। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद निकट भविष्य में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। सुरक्षा की समीक्षा के बाद उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनके मुख्यमंत्री पद को लेकर उठ रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा कब देते हैं।