नवादा : कहते हैं “कबिरदास की उलटी वाणी। बरसे कम्बल, भिंगे पानी” वाली कहावत जिले के ऐतिहासिक शीतल जलप्रपात ककोलत के लिए सटीक बैठ रही है। जिला प्रशासन ने ककोलत आने वाले सैलानियों के प्रवेश व वाहन पार्किंग शुल्क में वृद्धि क्या की, सैलानियों में संख्या में निरंतर कमी आ रही है। हालात यह है कि आमतौर पर सैलानियों को आकर्षित करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में वृद्धि की जाती है। ककोलत जलप्रपात विकास के लिए पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सौजन्य से ककोलत का विकास किया गया।
वैसे पूर्व में भी गर्मी के मौसम में दस से पंद्रह हजार सैलानियों का आगमन होता था। प्रवेश व वाहन पार्किंग शुल्क लागू होने के बाद स्थानीय लोगों की रुचि कम हुई लेकिन बाहर से आने वाले सैलानियों की संख्या में वृद्धि हुई।जिला प्रशासन व वन विभाग अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए प्रवेश व वाहन पार्किंग शुल्क में दस गुणा तक वृद्धि कर दी। परिणाम हुआ कि सैलानियों की संख्या में जहां लगातार वृद्धि हो रही थी तथा संख्या पन्द्रह हजार प्रतिदिन तक पहुंचने लगी थी जिला प्रशासन के निर्णय से संख्या में लगातार कमी आने लगी है।
हालात यह है कि शनिवार को संख्या घटकर 2600 हो गयी। रविवार को और कमी आने की संभावना है। जिस ककोलत को पर्यटन के नक्शे पर लाने के लिए जिले के वरीय पत्रकार स्व रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर व भैया जी ने अपनी लेखनी के माध्यम से आगे बढ़ाने का काम किया यहां तक कि ककोलत महोत्सव की शुरुआत की जिला प्रशासन ने पहले ना यादगार वर्षों से लगने वाले सतुआनी मेला को समाप्त किया फिर ककोलत महोत्सव को ककोलत में न करा नवादा में कराया गया। प्रवेश व पार्किंग शुल्क लगाकर स्थानीय लोगों को ककोलत से दूर किया और अब बाहर से आने वाले सैलानियों को दूर करने का काम किया जा रहा है। ऐसे में जिला प्रशासन के प्रति स्थानीय लोगों की नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
भईया जी की रिपोर्ट