राजद छोड़कर हाल ही में भाजपा में शामिल हो चुकीं रितु जायसवाल ने तेजस्वी यादव पर जमकर हमला बोला है। रितु ने तंज कसा कि तेजस्वी तो उनके मुंहबोले भाई थे, लेकिन रोहिणी आचार्या तो उनकी अपनी बहन थीं। रितु जायसवाल ने तेजस्वी से पूछा कि फिर उनके साथ ऐसा क्यों हुआ? आखिर रोहिणी आचार्या में क्या कमी रह गई थी? मालूम हो कि विधानसभा चुनाव में आरजेडी की हार के बाद हार के कारणों को लेकर तेजस्वी यादव और उनकी बहन रोहिणी आचार्या के बीच मतभेद सामने आए थे और उनके बीच जमकर झगड़ा हुआ था। रोहिणी चुनावी हार की समीक्षा और उस पर खुली चर्चा की पक्षधर थीं, जबकि तेजस्वी इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस से बचना चाहते थे। इसी को लेकर दोनों के बीच विवाद के बाद में रोहिणी आचार्या ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया था कि चुनावी हार के कारणों पर चर्चा के दौरान जब उन्होंने तेजस्वी यादव के सलाहकार संजय यादव का नाम लिया, तो उन्हें अपशब्द कहे गए और उनके ऊपर चप्पल भी फेंकी गई।
मैं बागी नहीं, जनता की आवाज हूं
रितु जायसवाल ने रोहिणी के इसी प्रकरण को लेकर तेजस्वी पर तंज कसा। इसके साथ ही उन्होंने खुद को बागी बताए जाने के सवाल पर कहा कि वह बागी नहीं हुई हैं। पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं की आवाज सुननी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि परिहार की जनता ने मुझे 65 हजार से अधिक वोट दिए। क्या इतनी बड़ी संख्या में जनता के समर्थन को बगावत कहा जा सकता है? रितु ने दावा किया कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी और विरोध के कारण ही परिहार में आरजेडी तीसरे स्थान पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि मामला सिर्फ टिकट का नहीं था, बल्कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं और सम्मान का था। भाजपा में शामिल होने के फैसले पर उन्होंने कहा कि वह ऐसी पार्टी से जुड़ रही हैं जो ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की बात करती है। उनके अनुसार भाजपा राष्ट्रहित, अंत्योदय और समाज के सभी वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की विचारधारा पर काम करती है। इसलिए उससे बेहतर विकल्प उनके लिए कोई नहीं हो सकता।
लालू से सीखें, कार्यकर्ताओं से जुड़ें
रितु जायसवाल ने तेजस्वी यादव को अपने नेतृत्व शैली और कार्यशैली में सुधार लाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को कार्यकर्ताओं से नियमित रूप से मिलना चाहिए और उनके लिए अपने घर तथा पार्टी के दरवाजे हमेशा खुले रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे हर वर्ग के लोगों, खासकर दूर-दराज से आने वाले गरीबों और कार्यकर्ताओं से आत्मीयता से मिलते थे। उनके घर के दरवाजे सभी के लिए खुले रहते थे और वे कार्यकर्ताओं को सम्मान देते थे। रितु ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के बाद पार्टी और कार्यकर्ताओं के बीच दूरी बढ़ती गई। यही दूरी आज आरजेडी की कमजोर होती स्थिति और सीटों में आई गिरावट की एक बड़ी वजह है।
सीतामढ़ी जिले की सिंहवाहिनी पंचायत की पूर्व मुखिया के रूप में पहचान बनाने वाली रितु जायसवाल 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से भाजपा उम्मीदवार गायत्री देवी के खिलाफ चुनाव लड़ी थीं, लेकिन हार गईं। इसके बाद आरजेडी में उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया। पार्टी ने उन्हें महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया और 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवहर सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि वह जेडीयू की लवली आनंद से हार गईं। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में जब आरजेडी ने उनकी सीट बदलने का फैसला किया, तो उन्होंने बगावती तेवर अपना लिए। इसके बाद रितु जायसवाल निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर परिहार सीट से चुनाव मैदान में उतर गईं। उनके चुनाव लड़ने से आरजेडी को बड़ा नुकसान हुआ और पार्टी तीसरे स्थान पर खिसक गई।