बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति ने इस अखिल भारतीय दर्शन परिषद के तीन दिवसीय अधिवेशन का उद्घाटन किया तो महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही, कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय एवं आयोजक जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार वाजपेयी ने संयुक्त रूप से इसका समापन किया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी केन्द्रिय विश्वविद्यालय, मोतीहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार सदैव विचारों की भूमि रही है। यह सदैव सनातन को विकसित एवं अनुपूरित करने वाली भूमि रही है। इस भूमि ने अपने चिन्तन से पाश्चात्य चिन्तन को भी परिमार्जित किया है। साथ ही यह भूमि महात्मा गांधी एवं जय प्रकाश नारायण के नव-प्रवर्तन विचारों की भूमि रही है। यह हर्ष का विषय है कि जय प्रकाश वि.वि. ने इतने स्थापित एवं प्रतिष्ठित संस्था के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का अपने यहां सफलतापूर्वक आयोजन किया।
समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने इस कार्यक्रम में भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए कहते है कि अपनी नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय दर्शन, चिन्तन एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा को एक विस्तृत फलक प्रदान किया। निःसंदेह इसका प्रतिफल यह हुआ कि भारतीय चिंतन दर्शन का व्यापक स्वरूप विश्व के दार्शनिकों के समक्ष प्रस्तुत हुआ। अवसाद और अस्तित्व संकट से जूझ रहे संपूर्ण विश्व के विद्वान भारतीय चिंतन दर्शन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

दूसरे विशिष्ट अतिथि कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने इस अधिवेशन के सफल आयोजन हेतु जय प्रकाश वि.वि. के कुलपति के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि भारतीय चिंतन दर्शन के मौलिक स्वरूप को जानने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा से अवगत होना होगा। हमारे सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत में ही है। चराचर सृष्टि की एकात्मकता ही भारतीय जीवन दृष्टि का मूल तत्व है जो ज्ञान व विज्ञान से पूर्ण है। वर्तमान युग में भारतीय चिंतन दर्शन की प्रासंगिकता और अधिक हो गयी है।
परिषद् के अध्यक्ष प्रो. अम्बिका दत्त शर्मा ने कहा कि हमारे लिए सुखद अनुभव है कि छपरा से हम दयाल स्वामी श्री अहैतानन्द जी महाराज के प्रेमाद्वैत सम्बन्धी विचार को आत्मसात करके जा रहे है। इस विचार तत्व को अखिल भारतीय दर्शन परिषद् अपने दार्शनिक अधिवेशन से विकसित एवं प्रसारित करने का प्रयास करेगा।
परिषद के सचिव प्रो. किस्मत कुमार सिंह ने दर्शन परिषद के अधिवेशन की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों सहित दर्शन परिषद् कार्यकारिणी एवं जय प्रकाश वि.वि. के प्र्रति आभार व्यक्त किया।
परिषद् के कोषाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने बताया कि इस आयोजन में लगभग 3000 शोध-पत्रों का पाठ किया गया और उन पर विचार-विमर्श हुआ।
जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति ने आये हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शिक्षकों, कर्मचारियों के द्वारा आयोजन को सफल बनाने में दिये गये योगदान की सराहना की, तथा उन्होंने चराचर संवेदी एकात्मकता की मूल भारतीय जीवन दृष्टि की वैश्विक महत्ता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

उद्घाटन के अवसर कुलपति जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति ने राज्यपाल सह कुलाधिपति के समक्ष अपने कार्यकाल में किये गये कार्यों की रूप-रेखा प्रस्तुत की। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में विश्वविद्यालचय में किये जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में भी विस्तृत जानकारी दी। इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान देने हेतु विभिन्न एमओयू, व्यावसायिक कार्यक्रमों, शैक्षनिक सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षक एवं मानक शोध-कार्यों की भी चर्चा की।
इस अवसर पर मंच पर 70वें अधिवेशन के सभापति प्रो. अमरनाथ झा एवं दर्शन-परिषद् की पत्रिका दार्शनिक त्रैमासिक के प्रधान सम्पादक प्रो. शैलेन्द्र कुमार सिंह भी उपस्थित थे।
उद्घाटन समारोह में कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋचा मिश्रा ने तथा समापन समारोह में डॉ. अर्चना उपाध्याय ने किया।
अन्त में अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के 70वें अधिवेशन के आयोजन सचिव प्रो. सुशील कुमार श्रीवास्तव ने सभी कुलपतियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन में आये हुए सभी प्रतिभागियों, विद्वानांे, शोधार्थियों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों, मीडिया सहयोगियों के प्रति अपना धन्यवाद ज्ञापन किया।