भागलपुर की लाइफलाइन और शहर को उत्तर बिहार के 16 जिलों से जोड़ने वाला गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा बीती देर रात 1 बजे टूट कर गंगा नदी में समा गया। पुल के पिलर संख्या 4 और 5 के बीच एक्सपेंशन जॉइंट में शाम से ही दरारें दिखीं थी जिसके बाद पुलिस ने आवाजाही रोक दी थी। इसके बाद देर रात में पुल का यह हिस्सा टूट गया और प्रशासन की तत्परता से रोकी गई आवाजाही के कारण सैकड़ों लोगों की जान बच गई। पुल क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर का सीमांचल से संपर्क पूरी तरह कट गया है। पुल निर्माण निगम ने यहां तैनात कार्यपालक अभियंता को निलंबित करते हुए इसकी जांच शुरू कर दी है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुल की मरम्मत कार्य में मदद के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से फोन पर बात की और बॉर्डर रोड निगम से इसमें सहयोग की अपील की।
इधर पुल टूटने की सूचना मिलते ही भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव और सदर एसडीएम विकास कुमार समेत कई वरीय अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और पुल पर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल ट्रैफिक को डायवर्ट कराया। वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से पुल की घेराबंदी कर दी गई है और भारी वाहनों को दूसरे रास्तों पर भेजा जा रहा है। प्रशासन अब विशेषज्ञों की टीम बुलाकर पुल की स्थिति का आकलन करने और मरम्मत कार्य शुरू करने की तैयारी में जुटा है। बताया जाता है कि इस पुल की करीब एक महीना पहले जांच की गई थी। उस समय इसमें कोई मेजर फाल्ट नहीं पाया गया था। लेकिन बीती रात अचानक पुल टूट गया। उत्तर प्रदेश पुल निगम के द्वारा यह पुल बनाया गया था और 2001 से इसपर आवागमन चल रहा था।
बिहार पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि पुल के मेंटेनेंस के लिए पहले ही डीपीआर बनाकर भेजी गई थी। जबकि पूर्व में आईआईटी पटना द्वारा किए गए निरीक्षण में पुल में किसी बड़ी क्षति की पुष्टि नहीं हुई थी। उन्होंने भागलपुर जिला और पुलिस प्रशासन की सजगता की सराहना करते हुए कहा कि समय रहते सतर्कता बरतने के कारण एक बड़ा हादसा टल गया और कई लोगों की जान बच गई। वर्तमान में पुल का एक स्पैन क्षतिग्रस्त होने के कारण रूट को डायवर्ट कर दिया गया है और आमजन की सुविधा के लिए स्टीमर से आवागमन व अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। विक्रमशिला सेतु का निर्माण यूपी ब्रिज कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन ने कराया था। यह पुल 2001 में चालू हुआ। 2016-2017 में खगड़िया पुल निर्माण निगम की देखरेख में 16 करोड़ रुपये की लागत से इसकी मरम्मत करायी गई थी।