नवादा : जिले के रोह प्रखंड कुंजैला गांव की रहने वाली किरण कुमारी ने डीएसपी बनकर एक मिसाल कायम की है। वह अपने गांव की पहली ऐसी लड़की हैं, जो बीपीएससी की अधिकारी बनी हैं। 70वीं बीपीएससी परीक्षा के परिणाम में किरण ने 962वीं रैंक हासिल की है। किरण फिलहाल गया में प्रशिक्षण ले रही हैं। किरण के पिता जगदीश प्रसाद ने बताया, “मैंने बेटी से शादी करने को कहा था, क्योंकि मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उसे बहुत आगे तक पढ़ा सकूं, लेकिन उसने शादी से साफ इनकार कर दिया.” तब किरण ने कहा था कि शादी में जितना खर्च करेंगे, उतना मेरी पढ़ाई पर लगा दें।

इसके बाद पिता ने शादी का निर्णय बदल दिया और उसे पढ़ाई के लिए दिल्ली भेज दिया। इसके लिए उन्हें अपनी कुछ जमीन बेचनी पड़ी। हालांकि, आज उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि उनकी बेटी ने अपनी मेहनत के बल पर डीएसपी का पद हासिल कर लिया है। बातचीत में किरण के पिता जगदीश प्रसाद बताते हैं कि पहले प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन मुख्य परीक्षा में असफलता मिली बावजूद वह विचलित नहीं हुईं। अपनी कमियों को दूर किया और अपनी मेहनत, लगन तथा दृढ़ निश्चय से खुद को मजबूत बनाकर सफलता हासिल की। किरण को यह सफलता अपने दूसरे प्रयास में मिली है।
किरण अपनी सफलता का ढोल नहीं पीटना चाहती थीं। जगदीश प्रसाद बताते हैं कि रिजल्ट आने के बाद भी किरण ने काफी दिनों तक इसे छिपाकर रखा। जब जॉइनिंग से पहले दस्तावेजों के सत्यापन का समय आया, तब परिजनों को इसकी जानकारी हुई। बीपीएससी का रिजल्ट आने पर जब पिता ने पूछा था, तब भी उसने कुछ नहीं बताया। पिता को लगा कि शायद इस बार भी चयन नहीं हो पाया है। लेकिन जब वह वेरिफिकेशन के कागजात लेकर नवादा आई, तब उसने बताया कि उसका चयन डीएसपी पद पर हो गया है। नियुक्ति पत्र लेते हुए तस्वीर सामने आने के बाद ही लोगों को उसकी इस बड़ी उपलब्धि का पता चला।
किरण की सफलता में उनकी बड़ी बहन का बहुत बड़ा योगदान रहा है। किरण ने तीन साल तक दिल्ली में रहकर तैयारी की। पिता बताते हैं कि तैयारी के दौरान जब वह पैसे नहीं भेज पाते थे, तब किरण की बड़ी बहन प्रिया उसकी आर्थिक मदद किया करती थी। यही वजह है कि किरण का अपनी बहन से गहरा लगाव है। तैयारी के दौरान घर आने पर किरण अपना ज्यादा समय जमुई में अपनी बहन के साथ बिताती थी। रिजल्ट आने के बाद भी वह सबसे पहले अपनी बहन के पास जमुई गई और सफलता की खबर साझा की। दरअसल, बड़ी बहन के पति के आकस्मिक निधन के बाद उन्हें डाक विभाग में नौकरी मिली थी। किरण अपनी बहन के बच्चों से बहुत प्यार करती है।

जगदीश प्रसाद ने बताया कि किरण बचपन से ही अलग स्वभाव की थी और पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहती थी। वह फालतू की बातों, बाजार जाने और समारोहों से दूर रहकर केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती थी। किरण का जन्म गांव में हुआ था, लेकिन जब वह 5-6 साल की थी, तब परिवार नवादा आकर रहने लगा। नवादा से शुरुआती पढ़ाई के बाद वह एक हफ्ते पटना रही और फिर दिल्ली चली गई। उसने प्रोजेक्ट कन्या स्कूल नवादा से 10वीं, आरएमडब्ल्यू कॉलेज से इंटर और स्नातक तथा दिल्ली से स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
किरण का पैतृक गांव रोह प्रखंड का कुंजैला है, लेकिन उनका परिवार फिलहाल जिला मुख्यालय के मिर्जापुर मोहल्ले में रहता है। उनकी मां रंजू कुमारी मिर्जापुर वार्ड-13 की आंगनबाड़ी सेविका हैं, जबकि पिता जगदीश प्रसाद कपड़े की एक छोटी दुकान चलाते हैं। किरण चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। बड़ी बहन प्रिया जमुई डाकघर में कार्यरत हैं, बड़ा भाई पंकज कुमार इलेक्ट्रिकल इंजीनियर बनकर नागपुर में और दूसरा भाई धीरज कुमार कर्नाटक में कार्यरत है। अब किरण डीएसपी बनकर परिवार और जिले का नाम रोशन कर रही हैं।

भईया जी की रिपोर्ट
