नवादा : जिले के काशीचक प्रखंड क्षेत्र के चर्चित चंडीनामा गांव के सभ्य शिक्षित,सक्रिय प्रखर सृजन कर्ता,निडर प्रहरी,जनहितैषी लोकप्रिय समर्पित सजग सच्चे समाज सेवी गरीबों के रहनुमा थे।ये शब्द व समाज साधक के रूप में काफी मशहूर थे। हिंदी मगही भाषा साहित्य के सशक्त शिल्पकार, रधिया खंड काव्य के रचयिता और मगधेश के नाम से विख्यात लेखक कवि मिथिलेश का 90 वर्ष की आयु में मध्यरात्रि के बाद देहावसान हो गया।
उनके निधन से समस्त मगही भाषा भाषी एवं प्रगतिशील विचारधारा के पोषक समाज हतप्रभ और शोकाकुल है। वे अपने पीछे भरा पूरा परिवार समेत लाखों प्रशंसक छोड़ गए हैं किंतु उनकी कालजयी रचनाओं के माध्यम से उन्हें युग युग तक याद किया जाएगा। उनका पार्थिव शरीर राजकीय इंटर विद्यालय माफी लाया गया जहां स्कूल के छात्र छात्राओं समेत शिक्षकों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसी विद्यालय में लंबे समय तक वे प्रधानाध्यापक के पद पर रहे और यही से सेवानिवृत्त हुए थे।
इसके पूर्व नवादा प्रलेस के जिला सचिव अशोक समदर्शी एवं कार्यकारी अध्यक्ष शंभू विश्वकर्मा ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और कहा कि आज हम सबों के लिए एक छायादार वटवृक्ष विलोपित हो गया। नए नए शिल्पकारों को अंगुली पकड़कर मगही भाषा साहित्य की बारीकियों तक पहुंचाने की कला केवल और केवल मिथिलेश के पास थी। कथाकार और कवि जयनंदन ने कहा कि दर्जनों पुस्तको में संग्रहित हजारों गीत, कविता, सैकड़ों कहानियां और दर्जनों उपन्यास, खंडकाव्य या प्रबंध काव्य उनकी अमर कृतियाँ है जो हिंदी मगही साहित्य के लिए अक्षय भंडार है। इनकी कई कहानियां और उपन्यास आज भी अप्रकाशित है जिसका प्रकाशन किया जाना शेष है।
वे सारथी पत्रिका के आजीवन संपादक रहे हैं जो मगही साहित्य का सबसे प्रतिष्ठित पत्रिका है। प्रलेस के जिला अध्यक्ष नरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि कोरोना काल से निर्बाध ऑनलाइन मगहिया दलान की अध्यक्षता आखिरी सत्र तक उन्होंने किया और हम सबको गुरुवाणी से तृप्त किया। उनके पुत्र निशु और शिशु ने बताया कि सिमरिया घाट के पास मराची के गंगा तट पर उनके पार्थिव शरीर का परालौकिक संवाद क्षिति, जल, पावक, गगन और समीर से हो चुका है।
मगही अवधेश मिथलेश जी का अचानक देश-समाज को स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम वेला में अलविदा कह चले जाने से खासकर मगही के क्षेत्र में जो अपूरणीय क्षति हुई है, उसे निकट भविष्य में पूर्ति असंभव है, लेकिन उन्होंने इतने उतराधिकारी पैदा कर दिया है कि अब उनके अधूरे सपने को पूरा करने में दुनिया की कोई भी ताकत नहीं रोक पाएगी। इसके लिए उनके विचारधारा के पक्षधरों ने पुनः इस संकल्प को दुहराया कि अपने कर्तव्य के साथ ही अपने लक्ष्य व उद्देश्य की दिशा में दृढ़ता व साहस के साथ आगे बढ़ने के लिए अंतःकरण कृत संकल्पित हैं। इसी के ही साथ आज जिले में चौरतफा समाज के हर तबकों के बीच में शोक,संवेदना, श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है।
भईया जी की रिपोर्ट