विनोद कुमार तिवारी, जन नीति विश्लेषक, न्यू दिल्ली
विषय: Delimitation का विरोध, MP/MLA की संख्या कम करो, और जनसेवक के सेवक खत्म करो
1. Delimitation का विरोध – संख्या कम करो:
मैं MP और MLA के Delimitation (परिसीमन) का विरोध करता हूं। जनता अपने जनसेवकों की संख्या बढ़ाना नहीं, कम करना चाहती है।
क्यों?
क्योंकि अभी जितने MP/MLA हैं और उनका MPLAD/MLALAD फण्ड है, उसका खर्च जनता उर्फ जनसेवक की मालिक उठा नहीं सकती। देश कर्ज में है। इसलिए मेरी मांग है:
- लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 848 करने के बजाय 543 से घटाकर 400 की जाए।
- हर विधानसभा की सीटें भी 20% कम की जाएं।
- MPLAD/MLALAD फण्ड पूरी तरह खत्म हो, ये पैसा सीधा जिला परिषद और नगर निगम को जाए जहां मालिक जनता खुद तय करे।
2. जनसेवक जो अपने लिए भी सेवक रखे है उसे समाप्त करें:
एक MP अपने साथ 10-15 निजी स्टाफ, PA, गनर, बंगले पर दर्जनों नौकर रखता है, जिसका खर्च मालिक जनता उठाती है। ये प्रथा खत्म हो। जनसेवक को कोई निजी स्टाफ सरकारी खर्चे पर न मिले।
3. प्रथम कैबिनेट जैसा सर्वदलीय राज:
केंद्र और राज्य में सभी पार्टियों की भागीदारी उनकी MP/MLA संख्या के अनुपात में हो।
4. एक देश, एक सुविधा
MP/MLA को यात्रा भत्ते के अलावा वो कोई सुविधा न मिले जो आम जनता को नहीं मिलती।
5. तलाकशुदा महिला-बच्चे: सबके लिए एक समान पेंशन:
मंत्री हो या आम आदमी, पेंशन नीति एक हो।
6. माननीय नहीं, जन सेवक:
इंदिरा गांधी ने His Highness खत्म किया, वैसे ही ‘माननीय’ शब्द खत्म हो, सिर्फ ‘जन सेवक’ हो।
7. रिटायरमेंट के बाद री-एंप्लॉयमेंट बंद:
IAS/IPS और ज्यूडिशियरी को रिटायरमेंट के बाद कोई पद न मिले। इससे युवाओं का रोजगार रुकता है और तीनों अंगों में करप्शन बढ़ता है।
8. जानकारी छिपाना = गुनहगार:
MP/MLA को गलत काम पता चले तो 7 दिन में बताना अनिवार्य, वरना बराबर का गुनहगार।
निष्कर्ष: जब मालिक ही गरीब है तो नौकरों की फौज क्यों? संख्या कम करो, सुविधा खत्म करो, तभी असली आजादी है। सादर,