-भूमि विवाद बढ़ाने में आग में घी डालने का किया जा रहा काम
नवादा : जिले का अकबरपुर अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है। ऐसे में भूमि विवाद को बढ़ावा मिल रहा है। वैसे सरकार की मंशा अंचल स्तर पर जनता दरबार लगाकर भूमि विवाद को समाप्त कराने की है लेकिन यहां सब उल्टा हो रहा है। इसके एक नहीं दर्जनों उदाहरण है।
ताज़ा मामला अकबरपुर बाजार नजामा मुहल्ले के इमामबाड़ा का है। कुछ स्थानीय दबंगों द्वारा इमामबाड़ा की भूमि पर भवन निर्माण का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मामला अंचल कार्यालय व थाना पहुंचा। थानाध्यक्ष ने स्थिति को भांपा तथा तत्काल भवन निर्माण पर रोक लगा दी। मंगलवार को भूमि की मापी के लिए अंचल कार्यालय ने अमीन की प्रतिनियुक्ति की। मापी आरंभ हुई, लेकिन लोगों को आश्चर्य तब हुआ जब बीच में भूमि माफियाओं से अमीन की मोबाइल पर हुई बातचीत के बाद मापी स्थगित कर दी गयी।
इसके पूर्व स्थानीय लोगों द्वारा निजी अमीन से भूमि की मापी करा स्थल चिन्हित किया गया था तथा सहायता के लिए वे भी वहां मौजूद थे। अब सबसे बड़ा सवाल आखिर मापी क्यों रोकी गयी? किसी प्रकार की अशांति नहीं थी। बावजूद मापी न करने से स्पष्ट है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ तो है। इसके पूर्व अजीमचक के संजय यादव की लगातार चार बार मापी की राशि जमा कराने के बावजूद भूमाफियाओं के दबाव में आजतक ने तो मापी की जा रही है न ही राशि वापस की जा रही है।
पूर्व प्रमुख रेणु देवी पति प्रदीप सिंह फतेहपुर को भूमाफियाओं के दबाव में आकर बगैर किसी कारण के मिट्टी भराई या निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई। मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया। इस प्रकार के कई उदाहरण हैं जिससे स्पष्ट होता है कि अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है जहां नियम कानून नहीं अंचल अधिकारी व कर्मचारियों की मनमानी चलती है। ऐसे में इमामबाड़ा का मामला भी न्यायालय पहुंच जाय तो कोई आश्चर्य नहीं।
भईया जी की रिपोर्ट