नवादा : जिले के हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र के अस्पताल रोड पर निर्माणाधीन वेंडिंग जोन को एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब डाक विभाग ने इस जमीन पर अपना दावा ठोक दिया और चल रहे निर्माण कार्य को रोकने की मांग की। इस घटना ने नगर परिषद और डाक विभाग के बीच एक गंभीर भूमि विवाद को हवा दे दी है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
अस्पताल रोड पर घमासान
वेंडिंग जोन या डाक विभाग की ज़मीन?यह विवाद मुख्य रूप से ज़मीन के मालिकाना हक को लेकर है, जहाँ दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क और दस्तावेज़ों का हवाला दे रहे हैं।
डाक विभाग का दावा
डाक अधीक्षक ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी आतिश रंजन से मुलाकात कर दावा किया कि मौजा पांचू स्थित खाता संख्या 717 और खेसरा संख्या 1365, 1366, और 1367 की भूमि केंद्र सरकार (डाक विभाग) की है। उनका आरोप है कि वर्तमान में चल रहा निर्माण कार्य इसी ज़मीन के एक हिस्से पर हो रहा है।
नगर परिषद का पक्ष
नगर परिषद का स्पष्ट कहना है कि वे जिस जमीन पर वेंडिंग जोन बनवा रहे हैं, वह खाता संख्या 1368 के अंतर्गत आती है और पूरी तरह से उनके अधिकार क्षेत्र में है।
कार्यपालक पदाधिकारी का कड़ा रुख
डाक विभाग द्वारा काम रोकने के आग्रह पर कार्यपालक पदाधिकारी आतिश रंजन ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “केवल मौखिक दावे पर सरकारी काम नहीं रोका जा सकता। यदि आपके पास भूमि के स्वामित्व से संबंधित वैध कागजात हैं, तो उसे तुरंत उपलब्ध कराएं। जिस क्षण यह साबित हो जाएगा कि जमीन आपकी है, मैं स्वयं वहां से निर्माण हटवा दूंगा।” अधिकारी के इस बयान ने डाक विभाग को चुनौती दी है कि वह अपने दावों के सबूत प्रस्तुत करे।
करोड़ों की बंदोबस्ती और तेजी से चल रहा निर्माण
उल्लेखनीय है कि नगर परिषद ने वर्ष 2026-2027 के लिए इस भूमि पर अस्थाई सब्जी मंडी और दैनिक बाजार के लिए 94,600 रुपये की सरकारी दर पर एक साल की बंदोबस्ती की है। संवेदक द्वारा यहां तेजी से शेड डालने का काम किया जा रहा है ताकि वेंडिंग जोन को जल्द शुरू किया जा सके।
आधिकारिक पत्र और अंचल अधिकारी का इनकार
इस क्रम में एक आधिकारिक पत्र (संदर्भ सं० 756/रा०, दिनांक 13.04.2026) सामने आया है, जो हिसुआ नगर परिषद पर भारत सरकार की ज़मीन पर अवैध निर्माण का आरोप लगाता है। पत्र के अनुसार, हिसुआ स्थित उप डाकघर से जुड़ी खाता संख्या- 720 और खेसरा संख्या- 1368 की भूमि सरकारी अभिलेखों में ‘भारत सरकार’ के नाम दर्ज है। पत्र में नगर परिषद पर इस भूखंड पर अवैध रूप से निर्माण कार्य कराने का आरोप लगाकर स्थल जांच करने और काम को रोकने की अनुशंसा की गई है। उलझन तब और बढ़ गई जब अंचल पदाधिकारी ने नगर परिषद कार्यालय के खिलाफ किसी भी तरह की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने से साफ इनकार कर दिया । उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस निर्माण के लिए कोई NOC नहीं दिए हैं।
निष्कर्ष और आगे की राह
फिलहाल, इस सीमा विवाद और परस्पर विरोधी दावों ने प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब सबकी नजरें डाक विभाग द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों पर टिकी हैं। यदि डाक विभाग समय पर कागज पेश नहीं कर पाता है, तो नगर परिषद अपना निर्माण कार्य जारी रखेगी। वहीं, अंचल पदाधिकारी के बयान और दूसरे पत्र ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है, जिससे नगर परिषद की कार्रवाइयों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सरकारी संपत्ति के संरक्षण और जनहित के बीच संतुलन बनाने की तत्काल आवश्यकता है।
भईया जी की रिपोर्ट