गया के बिपार्ड में आयोजित विधायक प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनप्रतिनिधियों से प्रश्नकाल और शून्यकाल का प्रभावी उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा जनता की आवाज उठाने का सर्वोच्च मंच है। विधायक जितने अधिक सवाल पूछेंगे, सरकार को जमीनी समस्याओं की उतनी बेहतर जानकारी मिलेगी और उनके समाधान का रास्ता भी मजबूत होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और जवाबदेही पर निर्भर करती है। उन्होंने विधायकों से आह्वान किया कि वे विधानसभा की कार्यवाही और संसदीय प्रक्रियाओं का अधिकतम उपयोग करते हुए जन समस्याओं को प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाएं।
विधायकों को AI पर स्पेशल सेशन
अपने संबोधन में सम्राट चौधरी ने बदलते तकनीकी दौर का उल्लेख करते हुए बिहार विधानसभा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की आवश्यकता जताई। गया जी बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (बिपार्ड) में उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने क्षेत्र की समस्याओं, अपेक्षाओं और सुझावों को सदन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विधानसभा केवल उपस्थिति दर्ज कराने का मंच नहीं, बल्कि जनता की आवाज बुलंद करने का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है। विधायक जितने अधिक सवाल उठाएंगे, सरकार को उतनी ही बेहतर तरीके से जमीनी समस्याओं की जानकारी मिलेगी और उनके समाधान का रास्ता निकलेगा।
संसदीय माध्यमों से जनता की ताकत बनें
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर विधायक को प्रश्नकाल और जीरो आवर का प्रभावी उपयोग करना चाहिए। यही वे संसदीय माध्यम हैं, जिनके जरिए क्षेत्र की समस्याओं को सीधे सरकार के सामने रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विधायकों के सवालों और सुझावों से जनसमस्याओं की वास्तविक तस्वीर सामने आए, ताकि समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, शून्यकाल, ध्यानाकर्षण, कटौती प्रस्ताव और अन्य संसदीय उपकरण केवल औपचारिक प्रक्रियाएं नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को मजबूती देने के प्रभावी माध्यम हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है।