नवादा : जिले के सदर अनुमंडल पदाधिकारी के द्वारा नियमित न्यायालय कार्य में रुचि नहीं लिये जाने से न्यायालय से जुड़े लोगों की परेशानियां बढ़नी शुरू हो गयी है। ऐसे में न्यायिक कार्य बाधित तो हो ही रहा है दबंगों की दबंगई व भूमि विवाद बढ़ता जा रहा है। अनुमंडल दंडाधिकारी को भूमि विवाद मामले में निषेधाज्ञा लागू करने व शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए दोनों पक्षों को प्रतिबंधित करने की शक्ति प्राप्त है।
निषेधाज्ञा के बाद दोनों पक्षों को सुनने के बाद अधिकतम दो महीने में निर्णय देना होता है। लेकिन जब एक वर्ष से नियमित न्यायालय कार्य हो ही नहीं तो न्याय प्रक्रिया का बाधित होना तय है। ऐसा होने से “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाली कहावत चरितार्थ हो रही है।
बताया जाता है कि पूर्व की तरह इधर एक साल से कोर्ट नियमित नहीं होता है जिससे अधिवक्ताओं की रोजी रोटी पर असर पड़ रहा है। जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व महासचिव संत शरण शर्मा ने डी एम से मांग किया है कि जल्द से जल्द पूर्व की तरह अनुमंडल कोर्ट नियमित किये जाने का आदेश निर्गत करने की जाये ताकि आम नागरिकों का विश्वास न्याय व्यवस्था पर कायम रह सके।
भईया जी की रिपोर्ट