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मंथन

बौद्धिक योद्धा

K.K Ojha
Last updated: May 2, 2026 2:31 pm
By K.K Ojha 42 Views
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9 Min Read
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कश्मीर घाटी में आतंकवादियों के विरूद्ध सैनिक कार्रवाई की सफलता में भ्रामक नैरेटिव को असरहीन करने के वाले ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ नामक प्रयोग की अहम भूमिका मानी जाती है। सेना द्वारा चलाये गए उस बौद्धिक, सामाजिक व सांस्कृतिक अभियान के योजनाकार व रणनीतिकार बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन थे। बांग्लादेश और नेपाल को अस्थिर करने के बाद भारत को अपना निशान बनाने के लिए बेताब डीप स्टेट को माकूल जवाब देने के लिए जयप्रकाश नारायण की जन्मभूमि छपरा से उन्होंने शिक्षकों व छात्रों से बौद्धिक योद्धा बनने की अपील कर दी।
बिहार के राज्यपाल पद पर आसीन होने के बाद लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने कुलाधिपति के रूप मंे अपने प्रथम सार्वजनिक सभा में शिक्षकों व विद्यार्थियों से बौद्धिक योद्धा बनने की अपील की। जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा में आयोजित अखिल भारतीय दर्शन परिषद के अधिवेशन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि विचारों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। उनका इशारा कश्मीर, पूर्वोत्तर के राज्यों में भारत की संस्कृति व राष्ट्रीयता पर प्रहार कर आतंकी गतिविधियांे के समर्थन में बनाये जाने वाले भ्रामक बौद्धिक-सामाजिक वातावरण की ओर था। जेनजेड को आत्मघाती व अराजक बनकर किसी देश की सार्वभौमिकता को रौंदने को बेताब डीप स्टेट के खतरनाक षड़यंत्र का शिकार भारत भी बन रहा है। कश्मीर में आतंकवाद के समूल नाश के लिए जेनरल अता हसनैन ने ‘हार्ट्स डॉक्ट्रिन’ (आम आदमी में विश्वास कायम करने) का प्रयोग किया था। इस प्रकार वे सीमा पर दुश्मनों से लड़ने वाले योद्धा के साथ ही देश के भीतर वैचारिक शत्रुओं से लड़ने वाले ‘बौद्धिक योद्धा’ भी हैं।
एक सामर्थ्यवान सैनिक अधिकारी के रूप में जनरल हसनैन कश्मीर में आतंकवादियों से जूझते रहे हैं। उन्हें मालूम है कि मजहब या विचाधारा के नाम पर चलने वाले आतंकी संगठन बौद्धिक विभ्रम के सहारे समाज में अपना पैठ बनाते हैं। समाज से शक्ति लेकर जनसामान्य का जीवन नरकीय कर देते हैं। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से सटे होने के कारण बिहार में इसका खतरा ज्यादा है। नक्सलवाद के नाम पर होने वाले नरसंहारांे के कारण बिहार में विकास की पहिया अवरूद्ध हो गयी थी। भारत को अस्थिर करने के लिए आतुर शक्तिशाली विदेशी शक्तियां विचार विभ्रम को अस्त्र बना कर अपने एजंेडे को पूरे भारत में चलाने के लिए बिहार का उपयोग प्लेटफार्म के रूप में करना चाहते हैं। देश की रक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं की समझ रखने वाले राज्यपाल ने बिहार के बुद्धिजीवियों को सजग कर दिया है।

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युवा आबादी की दृष्टि से भारत विश्व का सबसे बड़ा देश है। यहां के मजबूत लोकतंत्र और सशक्त सरकार पर प्रहार करने के लिए भारत विरोधी शक्तियां आभाषी माध्यम के सहारे आभाषी असंतोष का वातावरण तैयार करने के प्रयास में लगी हैं। सत्य लगने वाले असत्य व भ्रामक नैरेटिव के माध्यम से भारत को कमजोर करने के इस प्रयास को बौद्धिक जगत के लोग ही विफल कर सकते हैं। इसके लिए अभारतीय, अनैतिक और अराजक विचारों के फैलाव को रोकने के लिए जिस प्रकार के बौद्धिक कार्य की अपेक्षा है वह फिलहाल नहीं दिखता। केवल सरकार इस खतरे से निपटने में सक्षम नहीं है। अकादमिक जगत में विमर्श सुधार के महत्व को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने ज्ञान, विवेक, नवाचार, शोध, भारत बोध, राष्ट्रीयता के भाव के साथ ही नैतिकता के संतुलन पर बल दिया।
ग्रामीण परिवेश वाले बिहार के पुराने शहर छपरा में 23 मार्च 2026 से अखिल भारतीय दर्शन परिषद् का 70वां राष्ट्रीय अधिवेशन प्रारंभ हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस अधिवेशन में पूरे भारत से पांच सौ से अधिक देश-विदेश में प्रसिद्ध दर्शनशास्त्री व शोध अध्येता एकत्रित हुए थे। बौद्धिक व अकादमिक विमर्श की दिशा निर्धारण की दृष्टि से इस अति महत्वपूर्ण समारोह के उद्घाटन के अवसर पर बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति ले. जनरल हसनैन का संबोधन विश्वविद्यालयों के लिए नीति निर्देशक तत्व माना जा रहा है।
अपने संबोधन में उन्होने शिक्षकों और विद्यार्थियों को ‘बौद्धिक योद्धा’ तक कह दिया। साइबर युग में प्रामाणिकता व नैतिकता को दरकिनार करते हुए मानव मस्तिष्क को विकृत करने वाले कंटेंट का निर्माण बड़े पैमाने पर हो रहा है। ये कंटेंट विभिन्न साइबर माध्यमों के सहारे प्रेत की तरह निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में भटक रहे हैं। चाहे-अनचाहे लोग उन्हें देख व पढ़ रहे हैं जिससे भ्रम का वातावरण बनता जा रहा है। करोड़ों-अरबों के खर्च से चलने वाले इस उपक्रम के पीछे खड़ी शक्तियों के दृष्टिपथ में मानव एक उपभोक्ता या उपकरण मात्र है। इसके निशाने पर विश्व के विकसित देशों के साथ ही एशिया के विकासशील देश है। यह संगठित उपक्रम वास्तव में मानवता व मानव मूल्यों को समाप्त करने पर तुली है। बांग्लादेश और नेपाल में इनका षड्यंत्र सफल रहा है। भारत की मजबूत लोकतंत्रिक पृष्ठभूमि, प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और सक्षम सरकार के समक्ष इनके सारे षड्यंत्र विफल होते जा रहे हैं। लेकिन, खतरा अब भी मौजूद है।
अधिवेशन के कंेद्रीय विषय ‘चराचर संवेदी एकात्मकता: भारतीय जीवन दर्शन’’ के विविध पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव सभ्यता आज जिस अलगाव, विखंडन के संकट से गुजर रही है। इसका मूल कारण मनुष्य का प्रकृति और अन्य जीवों से अलगाव है। इस अलगाव की प्रवृति से मानव समाज, परिवार भी टूट रहा है। परिवार की जगह भौतिक लिप्सा व अहंकार से पीड़ित मानव का जीवन मूल्य जड़ता को प्राप्त हो रहा है। इस अलगाव का दार्शनिक प्रतिवाद आज की आवश्यता है। व्यापक विमर्श के साथ भविष्य की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक, नैतिक और पर्यावरणीय दृष्टि को एक वैचारिक नेतृत्व देने का प्रयास आज की आवश्यकता है।


अखिल भारतीय दर्शन परिषद के केंद्रीय विषय ‘चराचर संवेदी एकात्मता’ के निर्धारण के पूर्व विचार मंथन हुआ होगा। इस विषय की प्रासंगिकता पर भी विचार हुआ होगा। वर्तमान विश्व में सतत विकास को लेकर चिताएं प्रकट होती रही है। इस दृष्टि से यह विषय समय की आवश्यकता है।
उद्घाटन समारोह में जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार वाजपेयी ने कहा कि भारतीय दर्शन संपूर्ण सृष्टि को एकात्म दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है। आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मानवीय मूल्यों के संरक्षण को लेकर भारत ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के बुद्धिजीवी चिंतित है। दर्शन परिषद के अधिवेशन में इस पर विशेष जोर दिया गया है, इसका अभिनंदन है। इसके पूर्व कुलाधिपति ने मंच पर मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्जवलित कर विधिवत रूप से अधिवेशन का उद्घाटन किया। 23 से 25 मार्च तक चलने वाले इस तीन दिवसीय अधिवेशन का केंद्रीय विषय ‘चराचर संवेदी एकात्मता: भारतीय जीवन दर्शन’ ने देशभर के विद्वानों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित किया है।
अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति के रूप में ले. जनरल हसनैन का पहला अकादमिक समारोह था। उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन सम्पूर्ण सृष्टि को एकात्म दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है।
कश्मीर में उग्रवाद की समस्या से जूझने वाले ले.जेनरल हसनैन नैरेटिव वार की घातक क्षमता को बहुत अच्छे से जानते और समझते हैं। इसीलिए उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों से ‘बौद्धिक योद्धा’ बनने की अपील की।

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