टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED-SVU की जांच में खुलासा हुआ है कि रिशु श्री कथित तौर पर बढ़े हुए बिलों के बदले कमीशन लेता था और अधिकारियों से करीबी संबंध बनाकर फर्जी बिल पास करवाता था। मामले में दो IAS अधिकारी निलंबित हो चुके हैं, जबकि 15 अधिकारी जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार को लेकर करीब 15 कंपनियां ईडी की रडार पर आ गईं हैं और इनकी जांच की जा रही है। आरोप है कि इनमें से कुछ कंपनियों के ब्लैक लिस्टेड या डिबार होने के बावजूद भी करोड़ों रुपये के ठेके दिये गए। जांच के मुताबिक इन कंपनियों ने गलत दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए। बुडको एवं विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कमीशन और लड़कियों का नेटवर्क
बताया जाता है कि चर्चित टेंडर घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय और विशेष निगरानी इकाई को बड़ा सुराग मिला है। गिरफ्तार हाई-प्रोफाइल ठेकेदार रिशु रंजन सिन्हा उर्फ रिशु श्री ने पूछताछ के दौरान ED और SVU के सामने कई अहम खुलासे किए हैं। सूत्रों का दावा है कि रिशु श्री बढ़े हुए बिलों के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन के साथ-साथ कुछ अधिकारियों और नेताओं के लिए महिलाओं की व्यवस्था भी करता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि सरकारी टेंडरों के जरिए करोड़ों रुपये की अवैध कमाई के लिए उसने एक संगठित सिंडिकेट खड़ा कर रखा था, जिसकी पहुंच कई विभागों और अधिकारियों तक थी। इस मामले में राज्य सरकार अब तक दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित कर चुकी है। वहीं, विशेष निगरानी इकाई (SVU) की जांच में 15 आईएएस अधिकारी जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं। हालांकि, जांच अभी जारी है और एजेंसियां मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं।
फर्जी बिल पास कराने का फर्जी खेल
रिशु श्री सिर्फ सरकारी कामकाज तक ही सीमित नहीं था, बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारियों, उनकी पत्नियों की शादी की सालगिरह और बच्चों के जन्मदिन जैसी निजी जानकारियां भी अपने पास रखता था। ED की जांच में सामने आया है कि वह ऐसा अधिकारियों के साथ अपने संबंध मजबूत करने और प्रभाव बढ़ाने की रणनीति के तहत करता था। रिशु श्री के ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान एक डायरी भी बरामद हुई। इस डायरी में IAS अधिकारियों के नाम साफ-साफ नहीं लिखे हैं। इसके बजाय इसमें उनके संबंधित विभागों के नाम के साथ ‘M1’ और ‘M2’ जैसे कोड शब्द दर्ज हैं। इन एंट्रीज के बगल में करोड़ों रुपये के लेन-देन और साथ ही महंगे तोहफों की डिटेल बहुत ही बारीकी से दर्ज है। ED ने आरोप लगाया है कि सरकारी टेंडरों की कुल कीमत का 2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक का कमीशन सीधे वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की जेब में जाता था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन्हीं संपर्कों और रिश्तों का लाभ उठाकर वह फर्जी तथा बढ़े हुए बिलों को मंजूरी दिलवाने में सफल रहता था।