बिहार की राजनीति में मुस्लिम वोट लंबे समय से RJD के सबसे मजबूत सामाजिक आधार में माना जाता रहा है। लेकिन अब इसी वोट बैंक पर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने नजरें गड़ दी हैं। बीते दिन उन्होंने पटना के मुस्लिम बहुल सब्जिबाग इलाके में आयोजित अल्पसंख्यक सम्मेलन में कहा कि मैं बिहार के सभी सामाजिक वर्गों के लोगों से यह कहना चाहता हूं कि वे खुद को उनका हितैषी बताने वाले नेताओं के बहकावे में आने के बजाय अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करें। साफ है कि अल्पसंख्यकों के बीच दिये इस बयान में पीके का इशारा RJD की तरफ ही था। प्रशांत किशोर ने मुसलमानों से साफ कहा कि वे किसी राजनीतिक दल का पिछलग्गू न बनें और राजनीति में अपने समुदाय की उचित हिस्सेदारी के लिए खुद संघर्ष करें। उन्होंने लोगों से नेताओं के बहकावे में आने के बजाय अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करने की अपील की।
किसी पार्टी का पिछलग्गू मत बनिए
इस दौरान पीके ने हाल के बांकीपुर उपचुनाव में उन्हें मिले मुस्लिम समुदाय के समर्थन के लिए आभार जताया और कहा कि अल्पसंख्यकों को लोकतांत्रिक राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और इसके लिए एक उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की कोशिश होनी चाहिए। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदाय से किसी राजनीतिक दल के पीछे चलने के बजाय अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए खुद संघर्ष करने की अपील की। हालांकि प्रशांत किशोर ने अपने बयान में न तो राजद और न ही तेजस्वी यादव का नाम लिया। लेकिन बिहार की राजनीति में इस बयान के राजनीतिक मायने साफ तौर पर निकाले जा रहे हैं। वजह है मुस्लिम वोटरों का बड़ा हिस्सा, जिसे लंबे समय से राजद के सामाजिक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में जब पीके मुस्लिम मतदाताओं से यह कह रहे हैं कि वे किसी पार्टी के पिछलग्गू न बनें और अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व की चिंता खुद करें, तो इसका सीधा राजनीतिक असर राजद पर पड़ सकता है।
माना जा रहा कि पीके का यह संदेश तेजस्वी यादव के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मुस्लिम-यादव समीकरण राजद की राजनीति का अहम आधार रहा है। यानी पीके का सवाल सिर्फ मुस्लिम प्रतिनिधित्व का नहीं है। इसके पीछे यह संदेश भी छिपा है कि अगर कोई समुदाय किसी एक दल का स्थायी वोट बैंक बनकर रह जाता है, तो उसकी राजनीतिक सौदेबाजी की ताकत कम हो सकती है। प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल के उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं के एक हिस्से के जन सुराज की ओर जाने की चर्चा हुई। बांकीपुर सीट, जिसे लंबे समय से बीजेपी के प्रभाव वाली सीट माना जाता रहा है, वहां जन सुराज की जीत ने पीके के राजनीतिक दावे को नया आधार दिया है। यही कारण है कि प्रशांत किशोर अब मुस्लिम समुदाय के बीच सिर्फ समर्थन मांगते हुए नहीं, बल्कि राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व की बात करते नजर आ रहे हैं।