बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने आज मंगलवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र से मुलाकात की। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को मिली करारी हार के बाद इस मुलाकात को सियासी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है। यह मीटिंग बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार के तुरंत बाद होना यह बताता है कि एनडीए इस घटना को लेकर अंदर तक हिल गया है और इसे शीर्ष नेतृत्व के लिए जनता का एक सीधा संकेत कहा जा रहा है। बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज के प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार से अधिक मतों से हरा दिया। भाजपा और जदयू दोनों का मानना है कि बंकीपुर में वे किसी बाहरी से नहीं हारे, बल्कि उनके अपने ही वोट बैंक ने निराशा में आकर एनडीए से मुंह मोड़ लिया। ऐसे में इसपर तुरंत गंभीर मंथन और आत्मनिरीक्षण जरूरी है।
दरअसल, बांकीपुर सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। इस विधानसभा सीट पर 1995 से बीजेपी लगातार जीत दर्ज करती रही थी। बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार पांच चुनाव जीत चुके हैं। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी। लेकिन उपचुनाव में मिली हार से बीजेपी को करारा झटका मिला है। जिस जनसुराज पार्टी को नवंबर 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में एक सीट भी नहीं मिली थी, उसने बीजेपी के गढ़ में सेंध लगा दी और नतीजों से सबको चौंका दिया।
बांकीपुर के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। बीजेपी के मजबूत गढ़ में उसे पटखनी देने को राजनीतिक विश्लेषक महज चुनावी सफलता नहीं बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत मान रहे हैं। जिस सीट के लिए बीजेपी के नेताओं को इतना भरोसा था कि वे जिसे भी इस सीट से उम्मीदवार बनाएंगे, वह जीत जाएगा। लेकिन बांकीपुर की आम जनता ने इस थ्योरी को सिरे से नकार दिया। यही कारण है कि बांकीपुर के नतीजे के बाद एनडीए के शीर्ष रणनीतिकारों में हड़कंंप मचा हुआ है और इसी कारण आज नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से अहम मुलाकात की।