नवादा : जिले के अकबरपुर क्षेत्र में कभी जीवनरेखा मानी जाने वाली ऐतिहासिक खुरी नदी आज बदहाली से जूझ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस नदी का पानी आसपास की खेती और प्राकृतिक हरियाली के लिए महत्वपूर्ण था, उसके कई हिस्सों में अब कचरा और गंदे पानी की समस्या दिखाई देती है। नदी का सिकुड़ता स्वरूप, प्रदूषण और कथित अतिक्रमण पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय जल सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा रहे हैं।
लोक आस्था का महापर्व छठ नजदीक आने के साथ खुरी नदी की सफाई का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। छठ पूजा के दौरान व्रती जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसे में घाटों की सफाई के साथ पानी की गुणवत्ता और आसपास के वातावरण की स्वच्छता जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पर्व के समय सफाई कराने के बजाय नदी की बदहाली दूर करने के लिए स्थायी कदम उठाने चाहिए।
बुजुर्गों के अनुसार, पहले खुरी नदी का पाट अधिक चौड़ा था और बरसात के दिनों में इसमें पानी का तेज प्रवाह दिखाई देता था। समय के साथ नदी के किनारे मिट्टी भरने, कचरा जमा होने और निर्माण कार्यों के कारण इसके प्राकृतिक स्वरूप पर असर पड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। पचरुखी, अकबरपुर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में नदी के बहाव क्षेत्र के संकरा होने की बात भी कही जा रही है। नदी की पुरानी और मौजूदा चौड़ाई का वास्तविक आकलन पुराने नक्शों, राजस्व अभिलेखों और आधिकारिक स्थल मापी से ही किया जा सकता है।
खुरी नदी में घरेलू गंदे पानी और ठोस कचरे के पहुंचने की समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है। प्लास्टिक, पॉलिथीन और अन्य अपशिष्ट नदी के किनारे जमा होने से जल प्रवाह प्रभावित हो सकता है। यदि बिना उपचार के नालों का पानी नदी में गिरता है, तो इससे जल गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, नदी के पानी में प्रदूषण का वास्तविक स्तर जानने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी है। इसके लिए संबंधित विभागों को पानी के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए।
छठ पूजा से पहले घाटों की सफाई, रास्तों की मरम्मत, रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देना जरूरी है। लेकिन नदी में लगातार गंदा पानी गिरने और कचरा जमा होने की समस्या बनी रही, तो अस्थायी सफाई का असर लंबे समय तक नहीं टिकेगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन घाटों की सफाई के साथ नदी में गंदा पानी पहुंचने वाले स्रोतों की पहचान करे। इसके बाद अपशिष्ट जल के उचित प्रबंधन और नियमित सफाई की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि नदी की स्थिति में स्थायी सुधार हो सके।
नदियां आसपास के प्राकृतिक जलचक्र, वर्षा जल निकासी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खुरी नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा आने से स्थानीय जल निकासी और जल संचयन पर असर पड़ने की आशंका है। नदी के संरक्षण में देरी होने पर इसका प्रभाव आसपास के पर्यावरण और खेती-किसानी पर भी पड़ सकता है। भूजल स्तर में गिरावट या कृषि पर वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक आंकड़ों और क्षेत्रीय अध्ययन की आवश्यकता होगी।
खुरी नदी के संरक्षण के लिए सबसे पहले उसके वास्तविक बहाव क्षेत्र और सरकारी जमीन की पहचान करना जरूरी है। स्थानीय स्तर पर नदी के किनारे अतिक्रमण की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में जिला प्रशासन और अंचल कार्यालय को राजस्व अभिलेखों तथा पुराने नक्शों के आधार पर सीमांकन कराना चाहिए। जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ नदी में गिरने वाले नालों की पहचान और गंदे पानी के उपचार की स्थायी व्यवस्था करना भी जरूरी है।
पचरुखी पंचायत मुखिया प्रतिनिधि ब्रह्मचारी कुशवाहा ने नदी की सफाई और संरक्षण के लिए प्रशासनिक पहल के साथ जनभागीदारी को जरूरी बताया है। उन्होंने दोमुहाना से कोसुम्हार घाट तक खनन विभाग के माध्यम से करीब दो फीट गाद निकालने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार, इससे नदी की सफाई में कुछ हद तक मदद मिल सकती है। हालांकि, गाद निकालने से पहले तकनीकी सर्वेक्षण और पर्यावरणीय आकलन जरूरी है, ताकि नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाए बिना काम किया जा सके।
पांति के पैक्स अध्यक्ष विजय यादव का कहना है कि नदी के किनारे मकान और दुकान बनाए जाने से उसके अस्तित्व पर संकट बढ़ रहा है। उन्होंने खुरी नदी पुल के पास बचे हिस्से को बचाने के लिए समय रहते प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत बताई। स्थानीय प्रैक्टिशनर मो. खुर्शीद आलम ने नदी में कचरा जमा होने और सफाई की कमी की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने अतिक्रमण हटाने और नियमित सफाई कराने की मांग की।
अकबरपुर शोभायात्रा समिति के अध्यक्ष कौशल पांडे ने खुरी नदी की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए जल संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत बताई। उनका कहना है कि नदी की उपेक्षा जारी रही, तो भविष्य में जल संकट की चुनौती बढ़ सकती है। ब्रह्मचारी कुशवाहा ने नदी की सफाई के लिए जनभागीदारी और प्रशासनिक समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने छठ महापर्व से पहले नदी और घाटों की स्वच्छता सुनिश्चित करने की मांग की।
खुरी नदी को बचाने के लिए घाटों की सफाई के साथ दीर्घकालिक योजना बनाना जरूरी है। इसमें नदी के बहाव क्षेत्र का सीमांकन, कथित अतिक्रमण की जांच, नालों के पानी का उपचार, ठोस कचरे का उचित निस्तारण और नियमित निगरानी शामिल होनी चाहिए। प्रशासन, स्थानीय निकायों और नागरिकों के समन्वय से ही नदी की स्थिति में टिकाऊ सुधार संभव है। ऐसे में अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि छठ महापर्व से पहले सफाई के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और नदी के पुनर्जीवन के लिए कोई स्थायी पहल होती है या नहीं।
भईया जी की रिपोर्ट