नवादा : जिले के वारिसलीगंज व कौआकोल प्रखंड क्षेत्र के बाली व पांडेयगंगौट गांवों में दो दिवसीय मड़ही पूजा का आयोजन 28 अक्टूबर से आरंभ होगा। मड़ही पूजा की तैयारियों को आयोजकों द्वारा अंतिम रूप दिया जा रहा है। 19 वीं शताब्दी के महान सूफी संत प्रेम पंथ के पथिक देवाशरीफ के सैय्यद हाजी हाफिज वारिस अली शाह के शिष्य पंचवदन सिंह उर्फ महंंथ बाबा की याद में मनाये जाने वाले पूजा समारोह में विभिन्न धर्मों के अंतर्राज्यीय समुदाय के हजारों श्रद्धालुओं का आगमन होता है। उनके रहने से लेकर भोजन व मनोरंजन की व्यवस्था आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा की जाती रही है।
पूजा के प्रथम दिन दिव्योपासना के साथ चादरपोशी कर विश्व शांति व अपने तथा अपने परिवार की सुख समृद्धि की कामना की जाती है। इसके साथ ही भजन व कौव्वाली का आयोजन का आयोजन किया जाता रहा है। दो दिवसीय समारोह में बच्चों व अन्य आगंतुकों के मनोरंजन के झूला समेत विभिन्न प्रकार के साधनों के साथ महिलाओं के श्रृंगार के लिए दुकानें सजती रही है। इसके अलावा चाट पकौड़े से लेकर मिष्ठान्न दुकानदार अपनी अपनी दुकानें सजाते रहे हैं जिससे मेला का दृश्य देखने को मिलता है।
इसके अलावा मन्नौती के बाद उत्पन्न संतानों का मुंडन संस्कार से मड़ही परिसर महिलाओं की गीतों से गुलजार रहता है। कुल मिलाकर बाली व पांडेयगंगौट में बुधवार व गुरुवार को आयोजित होने वाले मड़ही पूजा की तैयारियां चरम पर है। बाली में पूजा के संस्थापक महन्त स्वर्गीय वनारस प्रसाद सिंह द्वारा पूजा समाप्ति के तीसरे दिन आगंतुकों की विदाई के पूर्व खिचड़ी खिलाने की परंपरा आज भी उनके उत्तराधिकारी देवाश्रय कुमार चंचल द्वारा जीवंत रखें जाने से वहां की विशेषता में चार चांद लग जाता है।
भईया जी की रिपोर्ट
