नवादा : बिहार के कई अस्पतालों में 9 अक्टूबर को अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग हुई, लेकिन जिले के रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में करीब आठ वर्षों से खाली पड़े उपाधीक्षक के पद पर नियुक्ति नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। जब राज्य के अन्य अस्पतालों में अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, तो रजौली अनुमंडलीय अस्पताल को अब तक स्थायी उपाधीक्षक क्यों नहीं मिल सका? यह सवाल स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

रजौली अनुमंडलीय अस्पताल क्षेत्र के हजारों लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां उपाधीक्षक का पद लंबे समय से रिक्त रहना महज प्रशासनिक कमी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उपाधीक्षक अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और चिकित्साकर्मियों के बीच समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि करीब आठ वर्षों में भी इस पद पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो सकी। अब जबकि 9 अक्टूबर को कई अस्पतालों में ट्रांसफर-पोस्टिंग की प्रक्रिया हुई, रजौली को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी थी। लेकिन उपाधीक्षक की कुर्सी खाली रहने से लोगों की अपेक्षाओं को झटका लगा है।
आखिर रजौली के लिए योग्य अधिकारी क्यों नहीं मिल रहे हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग के पास अधिकारियों की कमी है या फिर इस अस्पताल की जरूरत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है? इन सवालों का जवाब विभाग को देना चाहिए। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में स्थायी उपाधीक्षक की नियुक्ति कब करती है? करीब आठ वर्षों का इंतजार आखिर कब खत्म होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।
भईया जी की रिपोर्ट

