नवादा : राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव द्वारा डीएम को त्रिसदस्यीय जांच टीम से पुर्नजांच के आदेश के बाद की गयी जांच प्रतिवेदन डीएम को सौंप दिया है। प्रतिवेदन राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव को भेजा जाना है ताकि अगली सुनवाई में इस पर अंतिम आदेश निर्गत किया जा सके। सौंपे गए जांच प्रतिवेदन से रजौली एसडीएम व एमओ के पीडीएस विक्रेता को अबतक बचाने में किये गये प्रयास की पोल खुल गयी है। जी हां! यहां हम बात कर रहे हैं जिले के रजौली प्रखंड अमांवा पूर्वी पंचायत पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान की फर्जी अनुज्ञप्ति का।
अनुज्ञप्ति को फर्जी साबित करने की लड़ाई वर्ष 22 से लगातार अबतक जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल लड़ रहे हैं। अनुज्ञप्ति का कोई अभिलेख जिला आपूर्ति कार्यालय या रजौली अनुमंडल कार्यालय में उपलब्ध न रहने के बावजूद बगैर अभिलेख नियम के विरुद्ध अनुज्ञप्ति नवीकरण किया जाता रहा। जाहिर है सारा खेल जिला आपूर्ति अधिकारी, रजौली एसडीएम व एमओ की मिलीभगत से होता रहा। त्रिसदस्यीय जांच कमिटी द्वारा सौंपे गए जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया है कि अनुज्ञप्ति से संबंधित कोई अभिलेख मौजूद नहीं रहने के कारण यह कहना संभव नहीं है कि विक्रेता के भाई राजेन्द्र पासवान की अनुज्ञप्ति नाबालिग योगेन्द्र पासवान को कैसे निर्गत कि गयी?
वैसे जांच कमिटी भी संदेह के घेरे में है। इसके पूर्व के जांच प्रतिवेदन में अगर इन सब बातों का उल्लेख किया जाता तो इतना समय जो बर्वाद हुआ उससे बचा जा सकता था। लेकिन योगेन्द्र पासवान को बचाने में सभी न केवल लगे रहे बल्कि अंतिम दम तक अपने स्तर से प्रयास भी किया ताकि थक हार कर आवेदक अपनी ओर से खुद अपना कदम पीछे खींच ले। लेकिन चर्चिल तो ठहरा थान हारे तो सारे लेकिन गए न पालने वाला हो अब सारी निगाहें राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव के निर्णय पर टिकी है जिसका इंतजार हर किसी को रहेगा।
भईया जी की रिपोर्ट