नवादा : जिले में कानून का नहीं, दबंगों का राज चलता है। जी हां! ऐसा हम नहीं बल्कि दस्तावेज कह रहा है। इस प्रकार के एक नहीं सैकड़ों ऐसे मामले हैं जो चिख चिखकर सरकार व प्रशासन को चुनौती दे रहा है। ताज़ा मामला जिले के सिरदला प्रखंड साढ़ मझगांवा पंचायत बिलारपुर गांव का है। गांव में महादलित परिवार का सरयू डोम अपने परिवार के साथ वर्षों से निवास कर रहा है। नाम से ही स्पष्ट हो जाता है कि गांव में वह पूर्णतः अकेला परिवार है। उसकी अपनी भूमि है बावजूद गांव के दबंगों द्वारा आशियाना बना नहीं दे रहा है।
जाहिर है गांव में बहुसंख्यक आबादी राजवंशी समाज की है। विधायक भी उसी समाज का हो तो मनोबल तो उंचा रहेगा ही सो मनोबल ऊंचा है और ऐसे लोगों को विधायक का साथ मिल भी रहा है तो प्रशासन से लगायी जा रही गुहार भी बेअसर साबित हो रही है। ऐसी भी बात नहीं है कि पीड़ित परिवार प्रशासन से गुहार नहीं लगा रहा लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। या फिर यूं कहें विधायक के स्वजातीय होने के कारण आंखों पर पट्टी बांध रखी है।
सरकार प्रतिदिन चिल्ला चिल्ला कर कह रही है जबरन भूमि पर कब्जा करने वालों की भूमि मुक्त कर असली मालिक को सौंपना प्रशासन की जिम्मेदारी है। बावजूद जिले में ऐसे हजारों मामले हैं जिसमें दबंगों ने भूमि कब्जा कर रखा है और लगान असली भूस्वामी चुका है लेकिन सरकार की घोषणा बेअसर साबित हो रही है।
जहां तक सवाल सरयू की है तो भूमि उसकी है, निवास भी कर रहा है लेकिन पक्का आशियाना बनाने में अड़चनें डाली जा रही है तथा उसे गांव छोड़ने को विवश किया जा रहा है और संवेदनहीन प्रशासन दबंगों के आगे सेवन हो टुकुर-टुकुर तमाशा देख रही रही है। ऐसे में प्रशासन की सोयी आत्मा को जागृत किये जाने की आवश्यकता है। अपना तो काम प्रशासन को आइना दिखाना है सो दिखा रहा हूं, शेष काम तो ———?
भईया जी की रिपोर्ट