– स्वास्थ्य प्रबंधक पर अभद्र व्यवहार का आरोप
नवादा : जिले के रजौली अनुमंडल अस्पताल में प्रवर्धन व जीएनएम आमने-सामने आ गए हैं। GNM रूनी कुमारी ने अस्पताल स्वास्थ्य प्रबंधक विकास कुमार के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।

आरोप है कि स्वास्थ्य प्रबंधक जब भी फोन पर बातचीत करते हैं, तो उनका लहजा अभद्र रहता है। रूनी कुमारी के मुताबिक, इस तरह के व्यवहार से अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर असंतोष जताया है। स्वास्थ्य प्रबंधक विकास कुमार की ओर से इन आरोपों पर कोई अलग पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।
प्रभारी उपाधीक्षक ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. दिलीप कुमार ने GNM रूनी कुमारी के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि 31 अक्टूबर को रूनी कुमारी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं थीं। इसी कारण उनसे स्पष्टीकरण की मांग की गई है। इस तरह एक ही घटना को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं।
GNM जहां बायोमेट्रिक उपस्थिति का हवाला दे रही हैं, वहीं प्रभारी उपाधीक्षक उनकी अनुपस्थिति का दावा कर रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित दिन का बायोमेट्रिक रिकॉर्ड क्या कहता है और स्पष्टीकरण मांगने से पहले उपस्थिति की जांच किस आधार पर की गई?

अस्पताल की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में सामने आए इस विवाद ने अस्पताल के अंदर कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े किए हैं। GNM का दावा है कि अस्पताल में कई कर्मचारी प्रभारी उपाधीक्षक और स्वास्थ्य प्रबंधक की कार्यशैली से नाराज हैं। हालांकि, अन्य कर्मचारियों की शिकायतों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस पहलू पर संबंधित कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना जरूरी है।
निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगी सच्चाई
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बायोमेट्रिक उपस्थिति के बावजूद किसी कर्मचारी को अनुपस्थित बताकर स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है? क्या अस्पताल प्रबंधन ने संबंधित दिन की उपस्थिति रिपोर्ट की जांच की है? और यदि कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार हुआ है, तो इसकी शिकायत पर क्या कार्रवाई होगी?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रभारी उपाधीक्षक की ओर से स्पष्टीकरण मांगा गया है और GNM ने प्रबंधन पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। मामले में निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों के रिकॉर्ड की पड़ताल से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि वह कर्मचारी की बायोमेट्रिक उपस्थिति, स्पष्टीकरण की प्रक्रिया और लगाए गए व्यवहार संबंधी आरोपों की जांच करे, ताकि अस्पताल में कार्यरत कर्मचारियों के बीच भरोसा बना रहे और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
भईया जी की रिपोर्ट
