– नौंवी और सातवीं के बच्चों के संचालन में राष्ट्रवाद, वंदे मातरम्, तिरंगा, शहीद और वीरंगनाओं के प्रति गूंजे स्वर
नवादा : जिले के हिसुआ नगर के गया रोड स्थित नालंदा पब्लिक स्कूल में वंदे मातरम् कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में राष्ट्रवाद, वंदे मातरम्, तिरंगा, शहीद और वीरंगनाओं के प्रति दमदार स्वर गूंजे। राष्ट्रवाद और ओज की पंक्तियों के साथ समसामयिक और हास्य फुहार की बौछार हुई। वंदे मातरम् की 150 वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रीय कवि संगम का महाअभियान के तहत नालंदा पब्लिक स्कूल के सहयोग से आयोजन किया गया।
संगम के जिलाध्यक्ष प्रो विजय कुमार की अध्यक्षता, उपाध्यक्ष व्यंग्यकार उदय भारती के संयोजन और बच्चों के संचालन में कवियों ने जमकर समां बांधा। सातवीं की ज्ञानवी बरनवाल और नौवीं के शिवम् कौशिक ने संचालन किया। सम्मान सत्र का संचालन छात्रा आकांक्षा और प्रीति ने किया। दीप प्रज्जवलन के बाद स्वागत गीत अनामिका, आयुषि, परिधि, काजल, सुहानी पांडेय और रीया ने प्रस्तुत किया। निदेशक सुनील कुमार ने स्वागत संबोधन किया। उदय भारती ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि देश राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का 150 वां साल मना रहा है। राष्ट्रीय कवि संगम ‘राष्ट्र जागरण धर्म हमारा’ उद्देश्य पर निरंतर गतिमान है।
इसी कड़ी में वंदे मातरम् कवि सम्मेलन का देश व्यापी अभियान है। आयोजन के लिए उन्होंने नालंदा पब्लिक स्कूल प्रबंधन और निदेशक के प्रति आभार जताया। आमंत्रित कवियों में प्रांतीय सहमहामंत्री राणा वीरेंद्र सिंह ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य बच्चों में राष्ट्रवाद और साहित्य के प्रति लगाव पैदा करना है। हम इसे बल दें। प्रो विजय कुमार ने कहा कि इन बच्चों में ही देश के दिनकर, शास्त्री, नेपाली, महादेवी वर्मा और सुभद्रा कुमारी चौहान हैं। उन्हें हमें तराशकर निकालना है। बच्चे कविता कर देश को दशा-दिशा देने का काम करें।
इन कवियों ने बांधा समा
युगल किशोर राम ने जब पढ़ा कि जान लेके हथेली पे जइबै, तिरंगा हम नञ् झूकैबै तो स्कूली बच्चे जोश और उत्साह से भर गये। भारत माता की जय के नारे लगाने लगे। अभिमन्यु प्रजापति ने ओज की कविता से खूब वाह-वाही लूटी। गगन कुमार ने अतीत और बचपन के दिनों पर स्तरीय प्रस्तुति दी। ज्योति बरनवाल ने देश की जासूस नीरा आर्या की वीरगाथाओं का बखान किया।
मधुकांत ने सरहद के पार बसा है नफरत का एक पुराना घर सहित अन्य मधुर और प्रभावी प्रस्तुति से सबको मोहा। गीतकार राणा वीरेंद्र सिंह ने शहीद के पिता का दर्द बयां करते सिसक पड़े- बाबूजी हाल-ए-दिल अपना किसी से कह नहीं पाते से सबकी आंखे नम की। शफीक जानी नादां ने भारत मेरी नजर है, नजारा बिहार है, दिल से जीगर से जान से प्यारा बिहार है कविता से सबको बिहारी गर्व से भर दिया।
व्यंग्यकार उदय भारती ने आतंकवाद और मोबाइल का नयी पीढ़ियों पर प्रभाव पर हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुति दी। निदेशक सुनील कुमार सहित प्रबंधन के लोगों ने अतिथि और कवियों को अंगवस्त्र, मोमेंटो और उपहार देकर सम्मानित किया। धन्यवाद ज्ञापन वरीय अतिथि शिक्षक संजय कुमार सुधांशु ने की। मौके पर अशोक कुमार, बलेंद्र सिंह, राहुल कुमार, ज्ञान रंजन जी, विद्यालय शिक्षक अरुण कुमार, राकेश कुमार, सुनील कुमार, शिक्षिका बबीता कुमारी सहित अभिभावक, अतिथि और ग्रामीण उपस्थित थे।
भईया जी की रिपोर्ट