पटना : बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पटना की सर्वोच्च निर्णयकारी समिति ‘स्थायी समिति’ ने गत 29 मार्च को नियमावली के नियम-19 को विलोपित करने संबंधी लिए गए निर्णय की पुष्टि कर दी। बीते रविवार को आयोजित स्थायी समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया। इस निर्णय के बाद सम्मेलन के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ अध्यक्ष पद के लिए पुनः प्रत्याशी बनने के पात्र होंगे। अगस्त में समाप्त हो रहे वर्तमान पाँच वर्षीय कार्यकाल की यह स्थायी समिति की अंतिम बैठक थी।
बैठक में कुल सात प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें मतदाता निरूपण समिति द्वारा अद्यतन की गई मतदाता सूची का अनुमोदन, आगामी सत्र के लिए अध्यक्ष पद के निर्वाचन की प्रक्रिया प्रारंभ करने हेतु निर्वाचन पदाधिकारी से अनुरोध तथा वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंकेक्षण सहित विगत पाँच वर्षों के कार्यकाल की समीक्षा प्रमुख रही। राष्ट्रगान से प्रारंभ हुई बैठक में सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए वर्तमान कार्यकाल की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के निरंतर प्रयासों से उसकी प्रतिष्ठा न केवल देशभर में बढ़ी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसे नई पहचान मिली है।
बैठक में स्थायी समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रास बिहारी सिंह, सम्मेलन के वरीय उपाध्यक्ष जियालाल आर्य, उपाध्यक्ष एवं बिहार सरकार के पूर्व विशेष सचिव डॉ. उपेंद्रनाथ पाण्डेय, बिहार संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष एवं सम्मेलन के उपाध्यक्ष डॉ. शंकर प्रसाद, पूर्व प्राचार्या डॉ. कल्याणी कुसुम सिंह, मुज़फ़्फ़रपुर जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री उदय नारायण सिंह, सारण जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष ब्रजेंद्र कुमार सिन्हा, बक्सर जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष महेश्वर ओझा ‘महेश’, आरा जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. बलिराज ठाकुर, पश्चिमी चंपारण जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री आनंद किशोर मिश्र, लखीसराय जिला सम्मेलन के अध्यक्ष अरविंद कुमार भारती, उपाध्यक्ष देवेंद्र कुमार आज़ाद, अर्थमंत्री कुमार अनुपम, प्रचारमंत्री विभारानी श्रीवास्तव, लोकभाषा मंत्री डॉ. पुष्पा जमुआर, संगठन मंत्री डॉ. शालिनी पाण्डेय, पुस्तकालय मंत्री इं. अशोक कुमार, प्रबंध मंत्री कृष्ण रंजन सिंह, भवन-अभिरक्षक प्रवीर पंकज, वरिष्ठ सदस्य प्रो. व्रजभूषण शर्मा, वरिष्ठ कवि आर.पी. घायल, शिवानन्द गिरि, डॉ. संजय माँझी, डॉ. इंदु पाण्डेय, डॉ. विद्या चौधरी सहित अनेक सदस्यों ने विभिन्न प्रस्तावों पर अपने विचार व्यक्त किए।
बैठक में डॉ. दिनेश कुमार दिवाकर, डॉ. पूनम आनंद, रामेश्वर नाथ विहान, आराधना प्रसाद, डॉ. ऋचा वर्मा, श्रीकांत व्यास, जय प्रकाश पुजारी, डॉ. मनोज गोवर्धनपुरी, प्रो. उषा सिंह, सरिता कुमारी, शशिभूषण कुमार, आनंद मोहन झा, प्रो. अरुण कुमार सिन्हा, डॉ. सत्यानारायण उपाध्याय, संजय शुक्ल, सिद्धेश्वर, ओमप्रकाश पाण्डेय, अंबरीष कांत, राजेश भट्ट, शमा कौसर ‘शमा’, इंदु भूषण सहाय, डॉ. नीतू सिंह, डॉ. एम.के. मधु, डॉ. रेणु मिश्र, डॉ. सुमेधा पाठक, उर्मिला नारायण, ज्ञानेश्वर शर्मा, डॉ. प्रतिभा रानी, शंभु अमिताभ, सुनील कुमार दूबे सहित विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों एवं सैकड़ों सदस्यों की उपस्थिति रही। सभा के अंत में स्मृति-चिह्न के रूप में सामूहिक छायाचित्र लिया गया। राष्ट्रगान के साथ बैठक की कार्यवाही संपन्न हुई।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट