बिहार के किसानों को अब रोजाना सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 12 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। सरकार ने यह फैसला कई जिलों में सूखे जैसे हालात को देखते हुए लिया है। सरकार के इस कदम से किसानों को पटवन में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने आज गुरुवार को केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ राज्य में चल रही ऊर्जा परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की। बैठक में कृषि, सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों तक पर्याप्त और समय पर बिजली पहुंचाने के लिए सभी एग्रीकल्चर फीडरों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जाए।
इस समय राज्य सरकार एग्रीकल्चर फीडर के जरिये किसानों को सिंचाई के लिए बेहद रियायती दर पर बिजली उपलब्ध करा रही है। कृषि कनेक्शन पर किसानों को करीब 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। सरकार के मुताबिक कृषि उपभोक्ताओं को बिजली दर में लगभग 93 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है, ताकि खेती की लागत कम हो और किसानों को आर्थिक राहत मिल सके। राज्य में अब तक 2,700 से अधिक एग्रीकल्चर फीडर स्थापित किए जा चुके हैं। इन फीडरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए अलग बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का लक्ष्य हर खेत तक पर्याप्त बिजली पहुंचाना है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि हो सके।
केंद्रीय मंत्री के साथ समीक्षा बैठक में PM-KUSUM योजना के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को तेज करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसानों को भविष्य में सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सके। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी और व्यापक क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि योजना के लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जाए ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ताओं और किसानों को इसका लाभ मिल सके। बैठक में बिहार के लिए ग्रीन हाइड्रोजन नीति तैयार करने की दिशा में काम शुरू करने पर भी सहमति बनी। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल माहौल विकसित करने के निर्देश दिए गए।