पटना/अथमलगोला : बिहार में वर्ष 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। पंचायतों के परिसीमन और आरक्षण रोस्टर को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मौजूदा जनप्रतिनिधि और संभावित उम्मीदवार अपनी-अपनी चुनावी संभावनाओं का आकलन करने में जुट गए हैं।
इसी क्रम में अथमलगोला प्रखंड की मेउरा-फुलेलपुर पंचायत के सरपंच मिथिलेश पासवान ने कहा कि सरकार द्वारा परिसीमन और आरक्षण रोस्टर जारी होने के बाद ही वे तय करेंगे कि मुखिया, पंचायत समिति सदस्य या सरपंच में से किस पद से चुनाव लड़ना उनके लिए उपयुक्त रहेगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 के पंचायत चुनाव में उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय रामदेव पासवान की विरासत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सरपंच पद का चुनाव लड़ा था और जनता के समर्थन से विजयी हुए। उन्होंने कहा कि उनके पिता भी इसी पंचायत के सरपंच रह चुके हैं और लंबे समय तक लोगों की सेवा की थी।
सरपंच मिथिलेश पासवान ने बताया कि मेउरा-फुलेलपुर पंचायत में ग्राम कचहरी का अपना सरकारी भवन नहीं है। इसके कारण ग्राम कचहरी का संचालन किराये के भवन से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में ग्राम कचहरी में दीवानी और फौजदारी से संबंधित लगभग 250 मामले आए, जिनमें अधिकांश का निष्पादन किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों का निपटारा प्रक्रियाधीन है।
उन्होंने कहा कि मामलों के निष्पादन में ग्राम कचहरी के न्यायमित्र और सचिव का लगातार सहयोग मिला है। श्री पासवान का दावा है कि उनके कार्यों के कारण पंचायत में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है। उन्होंने विश्वास जताया कि पंचायत की जनता का समर्थन उन्हें आगे भी मिलेगा और वे अपने पिता की विरासत को कायम रखने के लिए पंचायत के किसी न किसी पद से आगामी चुनाव अवश्य लड़ेंगे।
सत्यनारायण चतुर्वेदी की रिपोर्ट