बिहार MLC चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज को बड़ा झटका लगा है। PK की पार्टी के तिरहुत शिक्षक सीट से घोषित उम्मीदवार भूषण कुमार झा ने टिकट लौटाकर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। जन सुराज की ओर से उम्मीदवार बनाए जाने के 24 घंटे के भीतर ही भूषण कुमार झा ने पार्टी छोड़ने और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान करते हुए एक प्रेस नोट भी जारी किया है। मीडिया से उन्होंने प्रशांत किशोर और पार्टी कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी बैठक में उन्हें अपनी बात रखने से रोका गया और उन पर दबाव बनाया गया। इसी कारण उन्होंने उनकी उम्मीदवारी वापस की और निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
इधर जन सुराज ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से होने वाले चुनाव के लिए अब श्याम नंदन यादव को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। भूषण झा द्वार उम्मीदवारी ठुकराने और निर्दलीय मैदान में उतरने के बाद जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बतौर प्रत्याशी नाम की घोषणा की। श्याम नंदन यादव जन सुराज से पहले राष्ट्रीय जनता दल में थे। अब जन सुराज में शामिल होने के बाद उन्हें तिरहुत एमएलसी सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। उधर उम्मीदवारी और पार्टी छोड़ने के बाद भूषण झा ने विज्ञप्ति जारी कर प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि माड़ीपुर के एक होटल सभागार में जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर जी की मौजूदगी में 25 सितंबर को एक सभा आयोजित थी। इसमें उन्हें तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के रूप में आमंत्रित किया गया था। इससे पूर्व कुछ समाचार पत्रों और यूट्यूब चैनलों पर उन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की सूचना प्रकाशित की गई थी। वह अपने साथ लगभग एक दर्जन शिक्षक साथियों के साथ मीटिंग में शामिल हुए थे।
भूषण झा के मुताबिक 25 सितंबर को मुजफ्फरपुर के माड़ीपुर स्थित एक होटल में जन सुराज की बैठक में उनसे अपनी बात रखने को कहा गया। लेकिन जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो उनके साथ आए शिक्षक साथियों को उनकी बात रिकॉर्ड करने से रोक दिया गया। भूषण झा ने कहा कि उन पर दबाव बनाया गया कि वे वही बोलें जो प्रशांत किशोर कहें। उन्होंने इस व्यवहार को आपत्तिजनक बताया। उनके अनुसार, बैठक में मौजूद शिक्षक साथी भी पार्टी के इस रवैये से असहज हो गए थे। प्रेस बयान में भूषण झा ने बताया कि बैठक से निकलने के बाद उन्होंने सैकड़ों शिक्षक साथियों से राय ली। इनमें से अधिकतर ने उन्हें स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की सलाह दी। इसके बाद उन्होंने जन सुराज से अलग होकर तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।