बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण का फैसला अब राज्य स्तर पर एकमुश्त नहीं, बल्कि पंचायतवार सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होगा। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि जनगणना के आधार पर कुल आबादी में जितनी आबादी एससी और एसटी की होगी, इन वर्ग को उतना प्रतिशत आरक्षण देना है। इसके बाद ही ईबीसी को आरक्षण दिया जा सकेगा। इसके लिए राज्य की पंचायतों मं EBC के आरक्षण को लेकर मानक विभाग की विशेषज्ञ टीम तैयार कर रही है। इस मानक को अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग भेजा जाएगा, जिसके बाद ही आरक्षण को लेकर सबकुछ स्पष्ट होगा। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने यह साफ किया है कि बिहार पंचायत चुनाव में EBC आरक्षण समेत सभी आरक्षण के लिए नए दिशा-निर्देश यानी गाइडलाइन बनाई जाएगी।
दरअसल, बिहार में पंचायत चुनाव होने हैं। लेकिन इसमें सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंचायत चुनाव में EBC को आखिर कितने प्रतिशत आरक्षण मिलेगा? इसका जवाब अब पंचायतवार आंकड़ों और इसके आधार पर तय गाइडलाइन में सामने आएगा। फिलहाल पंचायती राज विभाग की विशेषज्ञ टीम EBC आरक्षण के लिए मानक तैयार कर रही है। विभाग से यह गाइडलाइन जल्द ही अत्यंत पिछड़ा वर्ग आयोग को भेजी जाएगी। इसके बाद आयोग इन्हीं मानकों पर अध्ययन करेगी और सरकार को अपनी अनुशंसा देगी। इसके बाद सरकार अनुशंसा रिपोर्ट निर्वाचन विभाग को भेजेगी और चुनाव के लिए आरक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मंत्री दीपक प्रकाश ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस बार पंचायत चुनाव से पहले किसी भी पंचायत का नया परिसीमन नहीं होगा और चुनाव मौजूदा पंचायत सीमाओं पर ही कराए जाएंगे।
जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव में SC, ST और EBC के लिए टोटल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। ऐसे में EBC का हिस्सा सीधे 50 प्रतिशत नहीं होगा। पहले SC और ST की आबादी के आधार पर उनका आरक्षण तय होगा। इसके बाद 50 प्रतिशत की सीमा में जो हिस्सा बचेगा, उसमें EBC को आरक्षण मिलेगा। यानी ईबीसी के लिए पूरे राज्य में एक जैसा प्रतिशत तय करने के बजाय पंचायतवार स्थिति के आधार पर कोटा निर्धारित किया जा सकता है। पिछले पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग को 20 प्रतिशत आरक्षण मिला था, जबकि करीब 30 प्रतिशत आरक्षण एससी-एसटी के हिस्से में था। नई व्यवस्था में अगर किसी पंचायत में एससी-एसटी की आबादी अधिक निकलती है, तो ईबीसी के लिए उपलब्ध आरक्षण का हिस्सा कम हो सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी पंचायत में एससी-एसटी की आबादी 40 प्रतिशत है, तो 50 प्रतिशत की सीमा में ईबीसी के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत ही जगह बचेगी।