केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी की तबीयत अचानक बिगड़ गई जिसके बाद उन्हें पटना स्थित मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के अनुसार जीतन राम मांझी वायरल फीवर से पीड़ित हैं और उनके शुगर लेवल में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी को देखते हुए उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने अनुसार अभी केंद्रीय मंत्री की तबीयत स्थिर बनी हुई है और उनके स्वास्थ्य के सभी पैरामीटरों का रूटीन चेकअप किया जा रहा है। अभी तक मंझी के स्वास्थ्य को लेकर उनकी पार्टी की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन बताया जाता है कि डॉक्टर जरूरी चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट आने के बाद ही उनका हेल्थ अपडेट देंगे।
हालांकि HAM पार्टी के नेताओं ने दावा किया है कि जीतन राम मांझी की तबीयत ठीक है और वो रूटीन चेकअप के लिए एडमिट हुए हैं। उनकी पार्टी के नेताओं ने स्थिति स्पष्ट करते हुए लोगों को आश्वस्त किया है कि केंद्रीय मंत्री की सेहत को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता की कोई बात नहीं है। पार्टी के नेताओं ने बताया है कि वह किसी गंभीर समस्या के चलते नहीं, बल्कि एक सामान्य रूटीन चेकअप के लिए अस्पताल पहुंचे हैं। डॉक्टरों की देखरेख में उनकी आवश्यक मेडिकल जांच की जा रही है। पार्टी की ओर से यह भी साफ किया गया है कि उनकी सभी जांच रिपोर्ट सामान्य हैं और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। नेताओं ने आम जनता और समर्थकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें, और वह जल्द ही सभी के बीच लौटेंगे।
मालूम हो कि आजकल आरक्षण के मुद्दे को लेकर जीतन राम मांझी काफी मीडिया की चर्चा में बने हुए हैं। दरअसल, कोटा पर सबसे पहले चिराग पासवान ने कहा था कि आरक्षण संविधान की ओर से मिला अधिकार है, ना कि कोई खैरात। आरक्षण की व्यवस्था को खत्म करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। चिराग के इस बयान के बाद मांझी के बेटे संतोष सुमन ने कहा था, आरक्षण की समीक्षा की बात को इसके खत्म करने की मांग के रूप में देखना गलत है। इस बयानबाजी के बीच मांझी ने एक बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था, आरक्षण के अंदर पिछड़ी जातियों को अलग से आरक्षण मिलना चाहिए। साथ ही चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी।