तिब्बत-नेपाल सीमा पर एक और ग्लेशियर झील फटने से नेपाल में जलप्रलय के साथ ही बिहार में भी खतरे की स्थिति बन गई है। संभावित आपदा को देखते हुए बिहार में वाल्मीकिनगर से कोसी बराज तक हाई अलर्ट घोषित किया गया है। जल संसाधन विभाग और इंजीनियरों की टीम तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी कर रही है ताकि किसी भी संभावित तबाही से निपटा जा सके। इस बीच नेपाल में दो दिन पहले ग्लेशिर टूटने से हुई तबाही अब सैलाब बनकर गंडक नदी के साथ ही अन्य नदियों में प्रत्यक्ष तौर पर बिहार में दिख रही है। नेपाल से आ रहा बाढ़ पानी सब कुछ बहाकर लाता जा रहा है। गोपालगंज की गंडक नदी में जंगली जानवरों के साथ-साथ इंसानों की लाशें भी बहती हुई आ रही हैं। पश्चिम चंपारण और गोपालगंज के बीच गंडक नदी में कई लोगों की लाशें देखीं गईं हैं।

खबर है कि नेपाल के ऊपर चीनी क्षेत्र में ल्हेंदे नदी पर एक और बर्फ की झील फट गई है जिससे सैलाब का रेला नीचे की ओर चढ़ दौड़ा है। इस घटना का असर बिहार पर भी पड़ने की आशंका को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गंडक बराज, कोसी बराज पर सतर्कता बढ़ा दी है। जबकि सारण और अन्य जिलों में स्थित तटबंधों पर 24 घंटे कड़ी निगरानी का आदेश दिया गया है। कोसी पर बने वीरपुर बराज में पानी का फ्लो काफी तेज और उपर आ गया है। बताया जाता है कि नेपाल और चीन की सीमा पर एक और अस्थायी झील फट गई है जो ल्हेंदे नदी प्रणाली के ऊपरी हिस्से में बनी थी। यह झील ग्लेशियर के टूटने से बने मलबे की प्राकृतिक रुकावट के कारण बनी और कहा जा रहा है कि इसी ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने से इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत में अचानक बाढ़ आई थी। अब इस ग्लेशियर का दूसरा हिस्सा भी टूट गया है।
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद एक और ग्लेशियर झील टूटने की खबर जैसे ही सामने आई, बिहार के वीरपुर (कोसी) बराज पर निगरानी सख्त कर दी गई। बचाव व सुरक्षात्मक कदम के तहत कोसी बराज के 56 में से 17 फाटक खोल दिए गए हैं। जल संसाधन विभाग के अनुसार, पूर्वी और पश्चिमी तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा सभी स्पर और स्टड सामान्य स्थिति में हैं। शुक्रवार को समय-समय पर कोसी बराज से डिस्चार्ज में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, जो शाम छह बजे बढ़कर 1,44,775 क्यूसेक पहुंच गया। नेपाल की भोटे कोशी नदी से 10 हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है जिससे कई जिलों में भारी मात्रा में जल आने की आशंका जताई गई है।
