RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश भाजपा कोटे की सीट से एमएलसी तो मनोनित हो गए हैं, लेकिन अभी वे पूरी तरह सेफ जोन में नहीं हैं। अगर उनकी पार्टी रालोमो और भाजपा के बीच ठीक से सेटिंग नहीं बैठी तो उन्हें फिर मंत्री पद से हाथ धोना पड़़ सकता है। चूंकि जिस सीट पर उनका चयन विधान परिषद में बतौर एमएलसी किया गया है, उसका कार्यकाल अगले वर्ष मार्च में समाप्त हो जाएगा। ऐसे में वे फिर किसी भी सदन का सदस्य नहीं रह पायेंगे। इधर भाजपा लंबे समय से कुशवाहा की पार्टी का बीजेपी में विलय चाह रही है, परंतु कुशवाहा टालमटोल कर रहे हैं। लेकिन माना जा रहा कि कुशवाहा ज्यादा दिन तक अब टालमटोल नहीं कर पायेंगे क्योंकि भाजपा ने उनसे किया हर वादा पूरा कर दिया है। ऐसे में अब गेंद उनके पाले में है कि वे कब विलय को सहमति देते हैं।
दरअसल कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को 5 अगस्त को बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया गया है। इससे उनका मंत्री पद बच गया है, लेकिन उनका एमएलसी कार्यकाल मार्च 2027 में खत्म हो जाएगा। ऐसे में सात महीने बाद फिर से उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े हो सकते हैं। दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के लिए बीजेपी नेता देवेश कुमार ने अपना कार्यकाल पूरा होने से सात महीने पहले ही इस्तीफा दिया। इसके बाद राज्यपाल कोटे से खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को मनोनीत किया गया। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई भी गैर-विधायक अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। दीपक प्रकाश इस अवधि के करीब पहुंच चुके थे और इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल हुई थी।
इधर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बीजेपी लंबे समय से उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी RLM का विलय अपने साथ चाहती है। सूत्रों के मुताबिक पहले राज्यसभा सीट और अब एमएलसी पद दिए जाने के पीछे भी यही उम्मीद है। लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी का अस्तित्व बनाए रखा है और अपने बेटे दीपक प्रकाश के लिए मंत्री पद सुरक्षित रखने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में बीजेपी के भीतर भी अब यह सवाल उठने लगा है कि जब पार्टी के पास मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी जैसे बड़े कुशवाहा नेता हैं, तो फिर उपेंद्र कुशवाहा को लगातार राजनीतिक रियायत क्यों दी जा रही है। माना जा रहा है कि मार्च 2027 में 12 एमएलसी सीटें खाली होने पर RLM और बीजेपी के बीच फिर से राजनीतिक मोलभाव देखने को मिल सकता है। यही वह समय होगा जब कुुशवाहा को विलय पर मजबूर होना पड़ सकता है।