नवादा : कभी बिहार-झारखंड में विशिष्ट स्थान रखने वाले जिले के अकबरपुर में 1927 में स्थापित राजकीयकृत मध्य विद्यालय आगामी वर्ष 2027 में अपना गौरवशाली शताब्दी वर्ष पूरा करने जा रहा है, लेकिन विद्यालय इन दिनों अपने अस्तित्व को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गया है। शिक्षा विभाग के एक नए प्रस्तावित फैसले के विरोध में विद्यालय के पूर्व छात्र, अभिभावक, प्रबुद्ध समाजसेवी और स्थानीय नागरिक पूरी तरह से एकजुट हो गए हैं। आंदोलन पर उतरे प्रबुद्ध लोगों का साफ तौर पर कहना है कि यह विद्यालय केवल एक साधारण शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि संपूर्ण अकबरपुर प्रखंड की एक अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है और ग्रामीण क्षेत्र की असली पहचान है।
निवर्तमान प्रधानाध्यापक स्व देवनाथ सिंह के कुशल नेतृत्व में विद्यालय को तब के संयुक्त बिहार-झारखंड में विशिष्ट स्थान दिलाया था। बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ श्रीकृष्ण सिंह ने विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भूरि भूरि प्रसंशा की थी। यहां तक कि उन्होंने निवर्तमान प्रधानाध्यापक स्व देवनाथ सिंह को राष्ट्रपति पुरस्कार की अनुसंशा की थी और तत्कालीन राष्ट्रपति डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 05 सितंबर 1962 को राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा था।
क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने शुरू किया जन आंदोलन
इस प्रस्तावित बदलाव के खिलाफ मुखर हुए पूर्व छात्रों और बुद्धिजीवियों में अरुण कुमार, अशोक कुमार, संजय कुमार, प्रख्यात समाजसेवी सतीश कुमार, मनोरंजन कुमार, विनोद कुमार सिंह, व्यवसायी अजय कुमार गुप्ता और वरिष्ठ शिक्षाविद् राजीव रंजन व जिले के वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र नाथ भैया ने विद्यालय के अस्तित्व को बचाने की मांग का पुरजोर समर्थन किया है। बुद्धिजीवियों का सामूहिक रूप से मानना है कि शताब्दी वर्ष के ठीक पहले इस ऐतिहासिक विद्यालय के मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करना क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत दोनों के साथ सरासर अन्याय होगा। आंदोलनकारियों ने कहा कि विद्यालय ने दशकों से हजारों विद्यार्थियों को शिक्षित कर उन्हें समाज के विभिन्न उच्च पदों पर प्रतिष्ठित कराया है।
कस्तूरबा विद्यालय की छात्राओं की सुरक्षा पर उठेगा सवाल
शिक्षविदों ने विभाग को चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षा विभाग को जमीनी स्तर पर कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले विद्यालय की ऐतिहासिक भूमिका और वर्तमान समय की शैक्षणिक जरूरतों का गंभीरता से आकलन करना चाहिए। पूर्व छात्रों ने तकनीकी पक्ष साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में विद्यालय परिसर से शिक्षा विभाग के कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य सफलतापूर्वक संचालित होते हैं। इसके साथ ही, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की करीब 100 छात्राएं प्रतिदिन यहां अपनी पढ़ाई के लिए आती हैं। विभाग द्वारा इस व्यवस्था को बदला गया, तो इन छात्राओं को दो किलोमीटर से अधिक की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे उनकी सुरक्षा और पढ़ाई दोनों बुरी तरह प्रभावित होगी।
शताब्दी समारोह को भव्य रूप से मनाने का सामूहिक संकल्प
जय अकबरपुर, जय शिक्षा, जय धरोहर के गगनभेदी नारों के साथ आंदोलनकारियों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि मध्य विद्यालय अकबरपुर के मूल अस्तित्व को हर हाल में यथावत बरकरार रखा जाए। इसके साथ ही वर्ष 2027 में विद्यालय का शताब्दी समारोह सामाजिक स्तर पर भव्य रूप से आयोजित किया जाए तथा विद्यालय के भविष्य के विकास में पूर्व छात्रों और समाज के प्रबुद्ध लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। स्थानीय लोगों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह विद्यालय समूचे क्षेत्र की एक अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण व अस्मिता को बचाए रखने के लिए शांतिपूर्ण जनआंदोलन आगे भी लगातार जारी रहेगा।
भईया जी की रिपोर्ट