वर्तमान युग, जिसमें ज्ञान केवल सूचना तक सीमित न रहकर सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन बन चुका है, ऐसे समय में रामालयम फाउंडेशन द्वारा आयोजित शिक्षा और समाज विषयक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार ने विचारों के एक ऐसे मंच का निर्माण किया, जहाँ शिक्षा के विविध आयामों पर गहन, सार्थक और दूरगामी दृष्टि से युक्त विमर्श संपन्न हुआ।इस आयोजन की विशेषता केवल इसकी विषय वस्तु नहीं थी, बल्कि इसमें सम्मिलित हुए विद्वानों का बौद्धिक योगदान, उनकी दूरदर्शी सोच और अनुभवजन्य मार्गदर्शन भी था, जिसने पूरे कार्यक्रम को एक उच्च स्तरीय शैक्षणिक संवाद का स्वरूप प्रदान किया।
प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे, प्रो. बी. सी. त्रिपाठी, प्रो. देव प्रकाश मिश्रा, डॉ. सत्यनारायण साहू तथा श्रीमती पूनम मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति ने इस वेबिनार को न केवल प्रतिष्ठा प्रदान की, बल्कि इसके विमर्श को भी नई दिशा दी। उनके गहन विचार, विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण और मार्गदर्शक वक्तव्यों ने शिक्षा और समाज के अंतर्संबंधों को नई दृष्टि से समझने का अवसर प्रदान किया। शिक्षा को केवल शैक्षणिक प्रक्रिया न मानकर उसे सामाजिक चेतना, नैतिक विकास और राष्ट्र निर्माण के आधार के रूप में देखने की प्रेरणा इस संवाद का केंद्रीय संदेश बनकर उभरी।
इस वैश्विक आयोजन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि इसमें विश्वभर से 20,000 से अधिक प्रतिभागियों एवं श्रोताओं ने ऑनलाइन माध्यमों के द्वारा सहभागिता की। उनकी उत्साही उपस्थिति, जिज्ञासापूर्ण प्रश्नों और सक्रिय सहभागिता ने इस आयोजन को एक जीवंत बौद्धिक उत्सव में परिवर्तित कर दिया। यह सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा से संबंधित सार्थक विमर्श आज वैश्विक स्तर पर लोगों को एक सूत्र में जोड़ने की क्षमता रखता है।यह वेबिनार केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह विचारों के आदान-प्रदान का एक ऐसा मंच सिद्ध हुआ, जिसने शिक्षा और समाज के बीच सेतु निर्माण का कार्य किया। यहाँ प्रस्तुत हुए विचार आने वाले समय में नीति-निर्माण, शैक्षणिक सुधार और सामाजिक जागरूकता के नए आयाम स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।अंततः, “शिक्षा और समाज” विषयक यह संवाद इस तथ्य को सशक्त रूप से रेखांकित करता है कि जब ज्ञान, अनुभव और सहभागिता एक साथ आते हैं, तब वे केवल चर्चा नहीं करते, बल्कि भविष्य की दिशा भी निर्धारित करते हैं।