By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Swatva Samachar
Notification
  • Home
  • देश-विदेश
  • राज्य
  • राजपाट
  • खेल-कूद
  • मनोरंजन
  • अपराध
  • अर्थ
  • अवसर
  • आप्रवासी मंच
    • बिहारी समाज
  • मंथन
  • वायरल
  • विचार
  • शिक्षा
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
  • वीडियो
  • E-Magazine
Font ResizerAa
Swatva SamacharSwatva Samachar
  • देश-विदेश
  • राजपाट
  • खेल-कूद
  • मनोरंजन
  • अपराध
  • अर्थ
  • अवसर
  • आप्रवासी मंच
  • बिहारी समाज
  • मंथन
  • वायरल
  • विचार
  • शिक्षा
  • संस्कृति
  • स्वास्थ्य
Search
  • About us
  • Advertisement
  • Editorial Policy
  • Grievance Report
  • Privacy Policy
  • Terms of use
  • Feedback
  • Contact us
Follow US
मंथन

चार कुलपतियों ने किया समारोप

Swatva Desk
Last updated: May 4, 2026 4:12 pm
By Swatva Desk 44 Views
Share
5 Min Read
SHARE

बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति ने इस अखिल भारतीय दर्शन परिषद के तीन दिवसीय अधिवेशन का उद्घाटन किया तो महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव, मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही, कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय एवं आयोजक जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. परमेंद्र कुमार वाजपेयी ने संयुक्त रूप से इसका समापन किया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी केन्द्रिय विश्वविद्यालय, मोतीहारी के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार सदैव विचारों की भूमि रही है। यह सदैव सनातन को विकसित एवं अनुपूरित करने वाली भूमि रही है। इस भूमि ने अपने चिन्तन से पाश्चात्य चिन्तन को भी परिमार्जित किया है। साथ ही यह भूमि महात्मा गांधी एवं जय प्रकाश नारायण के नव-प्रवर्तन विचारों की भूमि रही है। यह हर्ष का विषय है कि जय प्रकाश वि.वि. ने इतने स्थापित एवं प्रतिष्ठित संस्था के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का अपने यहां सफलतापूर्वक आयोजन किया।
समापन समारोह के विशिष्ट अतिथि मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही ने इस कार्यक्रम में भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए कहते है कि अपनी नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय दर्शन, चिन्तन एवं भारतीय ज्ञान-परम्परा को एक विस्तृत फलक प्रदान किया। निःसंदेह इसका प्रतिफल यह हुआ कि भारतीय चिंतन दर्शन का व्यापक स्वरूप विश्व के दार्शनिकों के समक्ष प्रस्तुत हुआ। अवसाद और अस्तित्व संकट से जूझ रहे संपूर्ण विश्व के विद्वान भारतीय चिंतन दर्शन की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

- Advertisement -


दूसरे विशिष्ट अतिथि कामेश्वर सिंह दरभंगा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने इस अधिवेशन के सफल आयोजन हेतु जय प्रकाश वि.वि. के कुलपति के योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहाकि भारतीय चिंतन दर्शन के मौलिक स्वरूप को जानने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा से अवगत होना होगा। हमारे सभी प्राचीन ग्रंथ संस्कृत में ही है। चराचर सृष्टि की एकात्मकता ही भारतीय जीवन दृष्टि का मूल तत्व है जो ज्ञान व विज्ञान से पूर्ण है। वर्तमान युग में भारतीय चिंतन दर्शन की प्रासंगिकता और अधिक हो गयी है।
परिषद् के अध्यक्ष प्रो. अम्बिका दत्त शर्मा ने कहा कि हमारे लिए सुखद अनुभव है कि छपरा से हम दयाल स्वामी श्री अहैतानन्द जी महाराज के प्रेमाद्वैत सम्बन्धी विचार को आत्मसात करके जा रहे है। इस विचार तत्व को अखिल भारतीय दर्शन परिषद् अपने दार्शनिक अधिवेशन से विकसित एवं प्रसारित करने का प्रयास करेगा।
परिषद के सचिव प्रो. किस्मत कुमार सिंह ने दर्शन परिषद के अधिवेशन की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों सहित दर्शन परिषद् कार्यकारिणी एवं जय प्रकाश वि.वि. के प्र्रति आभार व्यक्त किया।
परिषद् के कोषाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने बताया कि इस आयोजन में लगभग 3000 शोध-पत्रों का पाठ किया गया और उन पर विचार-विमर्श हुआ।
जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति ने आये हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, शिक्षकों, कर्मचारियों के द्वारा आयोजन को सफल बनाने में दिये गये योगदान की सराहना की, तथा उन्होंने चराचर संवेदी एकात्मकता की मूल भारतीय जीवन दृष्टि की वैश्विक महत्ता एवं प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।


उद्घाटन के अवसर कुलपति जय प्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति ने राज्यपाल सह कुलाधिपति के समक्ष अपने कार्यकाल में किये गये कार्यों की रूप-रेखा प्रस्तुत की। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में विश्वविद्यालचय में किये जाने वाले कार्यों के सम्बन्ध में भी विस्तृत जानकारी दी। इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान देने हेतु विभिन्न एमओयू, व्यावसायिक कार्यक्रमों, शैक्षनिक सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षक एवं मानक शोध-कार्यों की भी चर्चा की।
इस अवसर पर मंच पर 70वें अधिवेशन के सभापति प्रो. अमरनाथ झा एवं दर्शन-परिषद् की पत्रिका दार्शनिक त्रैमासिक के प्रधान सम्पादक प्रो. शैलेन्द्र कुमार सिंह भी उपस्थित थे।
उद्घाटन समारोह में कार्यक्रम का संचालन डॉ. ऋचा मिश्रा ने तथा समापन समारोह में डॉ. अर्चना उपाध्याय ने किया।
अन्त में अखिल भारतीय दर्शन परिषद् के 70वें अधिवेशन के आयोजन सचिव प्रो. सुशील कुमार श्रीवास्तव ने सभी कुलपतियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजन में आये हुए सभी प्रतिभागियों, विद्वानांे, शोधार्थियों, शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों, मीडिया सहयोगियों के प्रति अपना धन्यवाद ज्ञापन किया।

TAGGED: अखिल भारतीय दर्शन परिषद, चार कुलपतियों, बिहार, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय
Share This Article
Facebook Twitter Whatsapp Whatsapp LinkedIn Telegram Copy Link
Did like the post ?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

You must be logged in to post a comment.

हमने पुरानी ख़बरों को आर्काइव में डाल दिया है, पुरानी खबरों को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक कर। Read old news on Archive

Live News

- Advertisement -

Latest News

पंचायत चुनाव 2026: अरवल में प्रपत्र-1 का प्रकाशन, आज से 18 मई तक दर्ज कराएं आपत्ति
बिहारी समाज
रेलवे ट्रैक पार करते समय हुआ हादसा, प्लेटफॉर्म पर खड़े लोग चिल्लाते रहे पर नहीं बच सकी जान
बिहारी समाज
जिला पदाधिकारी के जनता से साक्षात्कार कार्यक्रम में नागरिकों ने रखी अपनी समस्याएं
बिहारी समाज लेटेस्ट न्यूज़
तालाब का दूषित व गंदा पानी पीने को ग्रामीण मजबूर
बिहारी समाज
- Advertisement -

Like us on facebook

Subscribe our Channel

Popular Post

पंचायत चुनाव 2026: अरवल में प्रपत्र-1 का प्रकाशन, आज से 18 मई तक दर्ज कराएं आपत्ति
बिहारी समाज
रेलवे ट्रैक पार करते समय हुआ हादसा, प्लेटफॉर्म पर खड़े लोग चिल्लाते रहे पर नहीं बच सकी जान
बिहारी समाज
जिला पदाधिकारी के जनता से साक्षात्कार कार्यक्रम में नागरिकों ने रखी अपनी समस्याएं
बिहारी समाज लेटेस्ट न्यूज़
तालाब का दूषित व गंदा पानी पीने को ग्रामीण मजबूर
बिहारी समाज
- Advertisement -
- Advertisement -

Related Stories

Uncover the stories that related to the post!
मंथन

दार्शनिक अधिवेशन में परमहंस दयाल जी

छपरा विश्व प्रसिद्ध संत परमहंस दयाल जी महाराज की जन्मभूमि है। इनकी…

By Swatva Desk
मंथन

चराचर संवेदी एकात्मकता क्यों?

‘चराचर संवेदी एकात्मकता: भारतीय जीवन-दर्शन’ जैसे विषय पर व्यापक विमर्श क्यों? इसी…

By Swatva Desk
मंथन

नैरेटिव वार यानी मायावी युद्ध

गंगा, सरयू, गंडक यानी नारायण और सोन जैसे पवित्रतम नदियों से पोषित…

By Swatva Desk
मंथन

भारत के ‘अता’

बिहार के 43 वें राज्यपाल का नाम लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन…

By Swatva Desk
Show More
- Advertisement -

About us

पत्रकारों द्वारा प्रामाणिक पत्रकारिता हमारा लक्ष्य | लोकचेतना जागरण से लोकसत्ता के सामर्थ्य को स्थापित करना हमारा ध्येय | सूचना के साथ, ज्ञान के लिए, गरिमा से युक्त |

Contact us: [email protected]

Facebook Twitter Youtube Whatsapp
Company
  • About us
  • Feedback
  • Advertisement
  • Contact us
More Info
  • Editorial Policy
  • Grievance Report
  • Privacy Policy
  • Terms of use

Sign Up For Free

Subscribe to our newsletter and don't miss out on our programs, webinars and trainings.

[mc4wp_form]

©. 2020-2024. Swatva Samachar. All Rights Reserved.

Website Designed by Cotlas.

adbanner
AdBlock Detected
Our site is an advertising supported site. Please whitelist to support our site.
Okay, I'll Whitelist
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?