बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की नई नवेली सम्राट चौधरी सरकार के कामकाज के तरीके पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस सरकार को महज तीन लोग चला रहे हैं और वे मनमर्जी से बिना किसी सिस्टम के फैसले ले रहे हैं। इससे बिहार की 12 करोड़ आबादी और करोड़ों युवाओं में निराशा तथा असमंजस की परिस्थिति पैदा हो गई है। तेजस्वी ने राज्य की वर्तमान शासन व्यवस्था को अलोकतांत्रिक और अराजक बताते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व सीएम नीतीश कुमार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। इस संबंध में राजद नेता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिख कर सरकार चलाने के तरीके पर निशाना साधा।
नीतीश पर सीधा प्रहार, सरकार बनाने और बदलने का खेल
तेजस्वी ने पोस्ट में कहा कि पिछले एक पखवाड़े से बिहार की सत्ता केवल 3 लोगों के हाथों में सिमट कर रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधूरे मंत्रिमंडल के साथ, बिना किसी विमर्श, चिंतन और मनन के अलोकतांत्रिक तरीके से मनमर्जी के निर्णय लिए जा रहे हैं। तेजस्वी के अनुसार, सत्ता के लालच में एनडीए नेताओं ने नैतिकता और लोक लाज की मर्यादाएं त्याग दी हैं। पूर्व सीएम नीतीश पर प्रहार करते हुए तेजस्वी ने कहा कि बीते 12 वर्षों में 10 बार सरकार का गठन और पुनर्गठन हुआ है। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले 6 साल में 5 बार सत्ता का स्वरूप बदला है, जिसमें नीतीश कुमार ने कारण-अकारण 8 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। तेजस्वी ने इसे क्षणभंगुर विचारधारा बताते हुए कहा कि इस अस्थिरता ने शासकीय व्यवस्था को अंधेरे में धकेल दिया है और बिहारवासियों को उपहास का पात्र बनाया है।
46 फीसदी टाइम व्यर्थ करने का दावा, अराजक हुए हालात
तेजस्वी यादव ने सरकार की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मात्र 6 महीने में ही राज्य ने दो मुख्यमंत्री देख लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि षड्यंत्र से बनी इस पथभ्रष्ट सरकार के प्रथम वर्ष के कार्यकाल का 46.03% समय व्यर्थ हो चुका है। तेजस्वी ने चिंता जताई कि लगभग आधा समय गंवाने के बाद भी सरकार की प्राथमिकताएं, लक्ष्य, कार्यक्रम और नीतियां अब तक स्पष्ट नहीं हैं। राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर तेजस्वी यादव ने कहा कि आज बिहार बेलगाम नौकरशाही और अनियंत्रित भ्रष्टाचार के चंगुल में है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में वित्तीय कुप्रबंधन, गरीबी, पलायन और बेरोजगारी का दुष्चक्र चल रहा है। उनके अनुसार, बिहार की आवाम को अब इस निरर्थक सरकार से कोई उम्मीद शेष नहीं है क्योंकि यह सरकार आमजनों की बजाय तंत्र में बैठे लोगों की पोषक बनी हुई है। तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि 21 वर्षों की एनडीए सरकार की कार्यप्रणाली से बिहार के युवा, महिला, किसान और व्यापारी अब पूरी तरह नाउम्मीद हो चुके हैं। उन्होंने पूछा कि जो सरकार खुद स्वयं के लिए समस्या है, वह जनता का क्या समाधान करेगी?