बिहार में 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग के दौरान विधानसभा से गायब रहने वाले अपने तीन विधायकों को कांग्रेस पार्टी ने नोटिस भेजा है। बिहार कांग्रेस ने विधायक मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र प्रसाद और मनोज विश्वास से इस संबंध में 2 दिनों के अंदर जवाब देने को कहा है। बिहार में हुए राज्यसभा सीटों के चुनाव में एनडीए के सभी 5 उम्मीदवारों को जीत मिली और कांग्रेस आरजेडी वाले महागठबंधन का खाता भी नहीं खुल सका। बिहार प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव ने कहा कि 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव के मतदान के दौरान ये विधायक अनुपस्थित रहे थे। इस वजह से महागठबंधन को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। अनुशासन समिति के अध्यक्ष ने तीनों विधायकों को निर्देश दिया है कि वे इस संबंध में दो दिन में स्पष्टीकरण दें।
पार्टी ने लगातार की कोशिश, नहीं हो पाया संपर्क
इन तीनों विधायकों को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि—’मतदान के दौरान पार्टी द्वारा इन एनएलए से मोबाइल फोन के माध्यम से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन इन लोगों ने कॉल नहीं उठाया और बाद में उनके फोन स्विच ऑफ पाए गए’। नोटिस जारी होने के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि पार्टी इन तीनों विधायकों के खिलाफ़ कार्रवाई कर सकती है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि इसकी हकीकत कुछ और ही है। इस नोटिस का एक तकनीकी पहलू भी है, जिसके चलते पार्टी के लिए कार्रवाई कर पाना आसान नहीं होगा। कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि तीनों विधायकों के खिलाफ़ तभी कार्रवाई की जा सकती है, जब उन्होंने पार्टी का कोई आदेश नहीं माना हो। जबकि पार्टी ने इस बारे में कोई आदेश या व्हिप जारी ही नहीं किया था।
कांग्रेस पर उठे सवाल, व्हिप क्यों जारी नहीं किया
ऐसे में सियासी हलके में यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राज्यसभा चुनाव वाले दिन के लिए कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को व्हिप क्यों नहीं जारी किया? इस सवाल की वजह से बिहार के कांग्रेस के काम करने के तरीके पर भी अंगुली उठाई जा रही है। विस चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायक चुनकर आए। लेकिन चुनाव के 4 माह बीत गए हैं, परंतु आज तक इन 6 माननीयों में से अब तक विधायक दल का नेता नहीं चुना जा सका है। इसका परिणाम ये हुआ कि पार्टी विधायक दल का कोई सचेतक या व्हिप भी नियुक्त नहीं हो सका जिससे व्हिप जारी हो सके। चूंकि विधायक दल के नेता और व्हिप की नियुक्ति की औपचारिक जानकारी विधानसभा अध्यक्ष को देनी होती है जिसके बाद वहीं अपने विधायकों को वोट देने के लिए आदेश या व्हिप जारी कर सकता है। यह पूरी प्रक्रिया ही इस तकनीकी फाल्ट के चलते नहीं हो सकी। ऐसे में विधायकों पर कार्रवाई की संभावना नगण्य ही है।