नवादा : भूमि विवाद के मामले में पुलिस के हाथ बंधे रहने से असली भूस्वामियों की परेशानियां बढ़ गई है। ऐसे में उन्हें भवन निर्माण कार्य या अन्य कार्यों में व्यवधान का सामना करना पड़ रहा है। भवन निर्माण के पूर्व दबंगों द्वारा अनावश्यक वाद-विवाद खड़ा कर कार्य बाधित किया जा रहा है और पुलिस भूमि विवाद का मामला बताकर पल्ला झाड़ रही है। ऐसे में भूसंघर्ष होने की संभावना बढ़ती जा रही है।
पुरानी कहावत है
जोरु-जमीन, जोर के। नै तो छोड़ के। सरकार के एक आदेश ने इसे चरितार्थ करने में दबंगों को बल प्रदान किया है। फिर भूसंघर्ष कम होने के बजाय बढ़ना स्वाभाविक है। सरकार ने भूमि से संबंधित सारा अधिकारी अंचल अधिकारीयों को सौंप दिया है। अंचल कार्यालय पूर्व से ही दलालों का अड्डा बना हुआ है। ऐसे में त्वरित समस्या का समाधान संभव नहीं है।
ताज़ा मामला जिले के अकबरपुर प्रखंड क्षेत्र के फतेहपुर गांव का है। पूर्व प्रमुख रेणु देवी ने अनिल कुमार सिन्हा से फतेहपुर-नरहट पथ पर भूमि की खरीदारी की। कुछ भाग पर मकान निर्माण कर निवास कर रही है। परिवार बढ़ता है तब आगे मकान की आवश्यकता है सो गड्ढे भराने का काम आरंभ किया। कार्य आरंभ कराते कुछ दबंगों ने अंचल अधिकारी को सरकारी भूमि बताकर आवेदन देकर कार्य बंद करा दिया। आवेदन के आलोक में अंचल अधिकारी ने कार्य बंद करा भूमि की मापी करा चिन्हित किया। जाहिर है जब मापी हुई तो आरोप लगाने वालों को मुंह की खानी पड़ी। इस बीच बरसात आ गया फिर मिट्टी भराई संभव नहीं था।
अब जब पुनः शनिवार से मिट्टी भराई कार्य आरंभ किया तब एक साज़िश के तहत दबंगों ने महादलितों को आगे कर बलपूर्वक मिट्टी भराई करने पर न केवल रोक लगा दी बल्कि मिट्टी भराई के पूर्व रंगदारी के रूप में भारी भरकर राशि की मांग कर दी। पूर्व प्रमुख पति प्रदीप सिंह ने थानाध्यक्ष को आवेदन देकर सुरक्षा की गुहार लगायी लेकिन उन्होंने मामला भूमि विवाद बता पल्ला झाड़ लिया। अब सबसे बड़ा सवाल पूर्व प्रमुख की खरीदी गई भूमि के अगल बगल महादलितों की भूमि या मकान है क्या? अगर नहीं तो फिर उक्त गड्ढे भराने में रोक क्यों? अंचल अधिकारी ने भूमि पूर्व प्रमुख का घोषित कर दिया फिर रोक क्यों? इस प्रकार के सवाल भूस्वामियों द्वारा पूछे जाने लगे हैं।
भईया जी की रिपोर्ट