पटना। बिहार के कैबिनेट मंत्री और बीजेपी नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही यहां उपचुनाव की घोषणा की जा सकती है, लेकिन इससे पहले ही सियासी गलियारों में सुगबुगाहट और जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। इस चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने भी उतरने का एलान कर दिया है, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि बीजेपी का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर पार्टी इस बार किसे अपना उम्मीदवार बनाएगी?
हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल ( RJD ) छोड़कर बीजेपी में शामिल हुईं तेजतर्रार नेत्री रितु जायसवाल का नाम इन दिनों सियासी गलियारों में तेजी से तैर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रितु जायसवाल एक मजबूत जमीनी नेता हैं, लेकिन बीजेपी उन्हें बांकीपुर से टिकट देगी, इसकी संभावना कम ही नजर आती है। चर्चाएं जरूर जोरों पर हैं, लेकिन रितु जायसवाल को टिकट मिलने की उम्मीद कम है। रितु ठीक उपचुनाव के वक्त बीजेपी में आई हैं। इसके अलावा, बीजेपी पारंपरिक रूप से अपने कैडर और पुराने कार्यकर्ताओं को तरजीह देती है।
बांकीपुर विधानसभा सीट का इतिहास और इसका सामाजिक ताना-बाना बीजेपी के लिए सबसे निर्णायक कारक साबित होगा। भौगोलिक और जातीय दृष्टिकोण से पटना का यह इलाका कायस्थ बहुल माना जाता है। परिसीमन से पहले इस सीट का नाम ‘पश्चिमी पटना’ था, जहां से नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा लंबे समय तक विधायक रहे। 2006 में उनके निधन के बाद से नितिन नवीन यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। पटना के दो प्रमुख क्षेत्रों बांकीपुर और कुम्हरार में हमेशा से कायस्थ विधायक ही जीतते रहे हैं।
हालांकि, पिछले चुनाव में बीजेपी ने कुम्हरार सीट से वैश्य समाज से आने वाले अपने पुराने कार्यकर्ता संजय गुप्ता को टिकट दिया और वे जीते भी। कुम्हरार के बाद अब पटना में कायस्थ समाज के लिए बांकीपुर ही एकमात्र पारंपरिक सीट बची है। ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी अपने इस कोर वोटर और समाज को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएगी और किसी कायस्थ चेहरे को ही मैदान में उतारेगी। बांकीपुर सीट पर कायस्थ मतदाताओं के बाद वैश्य समाज की आबादी सबसे बड़ी है। इसके अलावा राजपूत, भूमिहार, कोइरी और अनुसूचित जाति/जनजाति के मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि यहां बीजेपी की पकड़ कितनी मजबूत है, नितिन नवीन ( बीजेपी-कायस्थ ) को 98,299 और रेखा कुमारी ( आरजेडी-वैश्य समाज ) को 46,363 वोट मिले थे।
दूसरी ओर, रितु जायसवाल की बात करें तो चुनावी राजनीति में उनका प्रदर्शन हमेशा दमदार रहा है, भले ही किस्मत ने उनका साथ न दिया हो 2020 विधानसभा में आरजेडी के टिकट पर परिहार सीट से लड़ीं और महज 1,549 वोटों के बेहद मामूली अंतर से हारीं। 2024 लोकसभा में आरजेडी की प्रत्याशी के रूप में शिवहर से चुनाव लड़ा और 29,143 वोटों से पीछे रहीं। पिछला विधानसभा चुनाव में आरजेडी से टिकट न मिलने पर परिहार से निर्दलीय चुनाव लड़ा। उन्हें 65,455 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि आरजेडी की आधिकारिक उम्मीदवार स्मिता गुप्ता (48,534 वोट) तीसरे स्थान पर खिसक गईं।
फिलहाल बीजेपी नेतृत्व प्रत्याशियों के नाम पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहा है। पार्टी के भीतर मंथन का दौर जारी है। क्या बीजेपी रितु जायसवाल के रूप में एक नए और आक्रामक चेहरे पर दांव लगाएगी या बांकीपुर की पारंपरिक पहचान को बरकरार रखते हुए किसी स्थानीय कायस्थ कार्यकर्ता को मौका देगी, यह देखना दिलचस्प होगा।