नवादा : किउल–गया रेलखंड के वारिसलीगंज रेलवे स्टेशन पर निर्माणाधीन सब-प्लेटफॉर्म के कार्य में भारी अनियमितता और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर घटिया सामग्री के खुलेआम उपयोग से कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मौके की तस्वीरें स्वयं इस बात की गवाही दे रही हैं कि निर्माण कार्य रेलवे के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर ईंट सॉलिंग के लिए नई ईंटों के बजाय बड़ी मात्रा में पुराने, टूटे-फूटे और जर्जर ईंटों के टुकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई स्थानों पर नई और पुरानी ईंटों को मिलाकर सॉलिंग बिछा दी गई है।
इसके बाद पीसीसी ढलाई की तैयारी की जा रही है, जबकि निर्माण मानकों के अनुसार ऐसा कार्य स्वीकार्य नहीं माना जाता। इतना ही नहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीसीसी ढलाई से पहले साइट की समुचित क्लियरेंस नहीं की गई। मिट्टी भराई के बाद न तो रोलर चलाकर भूमि का समतलीकरण एवं कंपैक्शन किया गया और न ही अन्य आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया अपनाई गई। ऐसे में भविष्य में प्लेटफॉर्म के धंसने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
निर्माण में प्रयुक्त सीमेंट की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि कम गुणवत्ता वाली सामग्री का उपयोग कर लाखों रुपये की सरकारी राशि की बंदरबांट की जा रही है। मामले की जानकारी लेने के लिए जब साइट पर मौजूद कनीय अभियंता से संपर्क किया गया तो उन्होंने किसी प्रकार की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। स्टेशन प्रबंधक भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी पहलुओं पर कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं दिखे।
दानापुर रेल मंडल के एडीआरएम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। जानकारी के अनुसार यह कार्य इरकॉन कम्पनी के द्वारा किया जा रहा है। कम्पनी के डीजीएम ने इस सबंध में कोई जानकारी नही दी। स्थानीय लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने, प्राक्कलन (एस्टीमेट) के अनुरूप कार्य की जांच करने तथा उपयोग की जा रही सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये की रेलवे परियोजना की गुणवत्ता प्रभावित होगी और इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ेगा।
भईया जी की रिपोर्ट