नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को नया सरकारी आवास आवंटित होने और पुराना बंगला न छोड़ने की जिद ने बिहार की राजनीति में नया संग्राम छेड़ दिया है। इस विवाद पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि राजतंत्र की तरह यहाँ मनमर्जी नहीं चलेगी। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सादगी का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि वे खुद महज 24 घंटे के नोटिस पर सरकारी आवास छोड़ने को तैयार हैं, क्योंकि सरकारें जनता की भलाई के लिए होती हैं, परिवार के कल्याण के लिए नहीं।
शेखपुरा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना नाम लिए राबड़ी देवी और राजद (RJD) परिवार पर जमकर तंज कसे। उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोगों को सिर्फ इस बात की चिंता सता रही है कि उनका सरकारी घर कैसे बचा रहे। यहाँ बेटे को अलग घर चाहिए, माता जी को अलग घर चाहिए और जनता को उन्होंने अपने हाल पर छोड़ दिया है।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि गत 15 अप्रैल को जब वे मुख्यमंत्री बने, तो नीतीश कुमार ने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। उन्होंने 1 मई को ही मुख्यमंत्री आवास खाली कर दिया और दूसरे घर में शिफ्ट हो गए। सम्राट चौधरी ने कहा कि पदभार संभालते ही मैंने मुख्यमंत्री आवास के बाहर लिखवा दिया था कि यह ‘लोक सेवक का आवास’ है और जनता की सेवा का माध्यम है। हम यहाँ जनता की भलाई के लिए आए हैं, अपने कल्याण के लिए नहीं।
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे 1999 से सरकार में मंत्री और विभिन्न पदों पर रहे हैं। आज वे जिस घर में हैं, वह उनका 11वां घर है। उन्होंने कहा कि मैं पिछले 10 वर्षों में कई बार मंत्री और उपमुख्यमंत्री रहा, लेकिन कभी सरकारी आवास के पीछे नहीं भागा और मात्र 2400 स्क्वायर फीट के अपने निजी घर में रहा। जिस दिन मेरी पार्टी और हमारे नेता कहेंगे कि आपका काम समाप्त हो गया, मैं 24 घंटे के भीतर अपना झोला उठाकर अपने निजी घर चला जाऊंगा।
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने नियमों के तहत राबड़ी देवी को एक नया आवास आवंटित किया है और 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करने का निर्देश दिया है। हालांकि, राबड़ी देवी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस आवास को नहीं छोड़ेंगी। विपक्ष इस कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार नीतीश कुमार के सुशासन के सिद्धांतों पर चल रही है, जहाँ कानून सबके लिए बराबर है।