पटना : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के 10 नंबर सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को खाली कराने के मामले पर बिहार का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ चुका है। इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने प्रदेश की ‘सम्राट सरकार’ पर चुन-चुनकर निशाना साधना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में आज सोमवार को आरजेडी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध और अपरिपक्वता का उदाहरण बताया।
आरजेडी नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री और सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि राबड़ी देवी के आवास के साथ जो व्यवहार किया जा रहा है, वह एक “अपरिपक्व मुख्यमंत्री” के आचरण को दर्शाता है। सरकार चाहती है कि विपक्ष उसकी हर बात में हां में हां मिलाए, और ऐसा न करने पर विपक्षी नेताओं को अलग-अलग तरीकों से टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान इस बात पर बिल्कुल नहीं है कि बिहार कैसे तरक्की करे, गरीबी रेखा से ऊपर कैसे उठे या विकसित राज्य कैसे बने। सरकार सिर्फ विपक्ष को डराने और चुप कराने के एजेंडे पर काम कर रही है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है।
अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री आवास (1 अणे मार्ग) के विस्तार को लेकर तीखा तंज करते हुए कहा कि मुझे देखकर आश्चर्य होता है कि वर्तमान मुख्यमंत्री को 1 अणे मार्ग आवंटित है, लेकिन उनका विजन इतना बड़ा है कि उन्हें और बड़ा मकान चाहिए। उन्होंने उपमुख्यमंत्री के आवास को भी सीएम आवास में मिला लिया है। एक तरफ प्रधानमंत्री देश में फिजूलखर्ची कम करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार के मुख्यमंत्री अपने बंगले का दायरा बढ़ा रहे हैं।
एनडीए नेताओं के बंगलों पर सिद्दीकी ने केवल अपना बचाव नहीं किया, बल्कि सत्तापक्ष के कई बड़े चेहरों और अधिकारियों को घेरते हुए पूछा कि वे किस हैसियत से सरकारी बंगलों पर काबिज हैं। उन्होंने कहा की नितिन नवीन (बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष) को किस हैसियत से सरकारी बंगला आवंटित किया गया है? तरैया के विधायक वे मंत्री स्तर के आवास में, राजू सिंह (पूर्व मंत्री) जो 11/13 नंबर बंगले में, दीपक कुमार (रिटायर्ड IAS) सेवानिवृत्त होने के बावजूद वे इतने बड़े सरकारी मकान में क्यों रह रहे हैं? संजय झा और उपेंद्र कुशवाहा इनके सरकारी बंगलों के आवंटन का आधार क्या है?