पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की Y + सुरक्षा पटना हाईकोर्ट ने फिर से बहाल कर दी है। इस संबंध में हाईकोर्ट ने बिहार सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा को डाउनग्रेड करने वाले आदेश को रद्द करते हुए कहा कि कार्यपालिका के निर्णय कानून और प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। हाईकोर्ट ने यह आदेश इस संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। सुनवाई में हाईकोर्ट ने पाया कि सुरक्षा घटाने से पहले कोई वस्तुनिष्ठ खतरा आकलन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कनिष्क अरोड़ा ने इसे अनुच्छेद 21 से जुड़ा मामला बताया, जबकि सरकारी अधिवक्ता किंकर कुमार ने राज्य सरकार के फैसले का पक्ष रखा। अदालत में पप्पू यादव की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा गया कि उन्हें अविलंब सुरक्षा प्रदान की जाए। कम से कम जो सुरक्षा उन्हें पहले से यानी Y + की जो सुरक्षा पहले से मिली हुई थी उसे तो बहाल रखा जाए। बहस के बाद माननीय न्यायालय ने यह पाया कि सांसद की सुरक्षा घटाने में अनियमितता हुई और इसे दुरुस्त करने का आदेश जारी कर दिया
दरअसल, सितंबर 2025 में बिहार सरकार ने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की सुरक्षा वाई प्लस से घटाकर वाई कर दी थीं। इसके बाद पटना हाईकोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की गई थी। अब अदालत ने पप्पू यादव के पक्ष में फैसला देते हुए उनकी फिर से Y + सुरक्षा बहाल करने का निर्देश दिया है। मामले में याचिकाकर्ता पप्पू यादव के वकील श्रीनंदन भारती ने बताया कि अदालत ने सुनवाई में यह माना कि पप्पू यादव की सुरक्षा को लेकर अनियमितता बरती गई थीं। इसलिए पप्पू यादव की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया गया है। उन्होंने बताया कि अदालत ने यह भी कहा कि अगर सांसद की जान को ज्यादा खतरा हो तो उन्हें जेड श्रेणी की सुरक्षा दी जा सकती हैं।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए पूर्व में 14 मई को अदालत ने कहा था कि यह देश नौकरशाही के शासन से नहीं, कानून के शासन से चलता है। इसलिए कार्यपालिका के फैसले कानू और निर्धारित प्रक्रिया के तहत होने चाहिए न कि अधिकारियों की मनमर्जी से। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के पश्चात मामला तत्काल पटना हाईकोर्ट में सूचीबद्ध हुआ था। उसके बाद 12 मई, 13 मई और 14 मई 2026 को लगातार तीन दिनों तक विस्तृत सुनवाई हुई। इस दौरान सभी पक्षों की लंबी बहसें सुनी गईं, राज्य सरकार से जवाब तलब किया गया, सरकारी रिकॉर्ड एवं संबंधित फाइल तलब कर न्यायालय द्वारा उसका परीक्षण किया गया। सुनवाई के दौरान पप्पू यादव की तरफ से कहा गया कि, याचिकाकर्ता को कुख्यात आपराधिक गिरोहों एवं संगठित अपराधियों से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। इसके बावजूद केंद्र एवं राज्य सरकार को अनेक बार सुरक्षा बढ़ाने हेतु कोई कार्रवाई नहीं की गई। दलील सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा को Y+ से घटाकर Y श्रेणी किए जाने के निर्णय से संबंधित सरकारी फाइल मंगाकर उसका परीक्षण किया, जिसके बाद उक्त निर्णय को निरस्त करते हुए राहत प्रदान की गई।