-आप भी कमाल के हैं एसडीओ साहब! मामला फर्जी अनुज्ञप्ति का
नवादा : आरटीआई नहीं होता और जिले के बहुचर्चित आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल बिके नहीं होते तो न फर्जी अनुज्ञप्ति का पर्दाफाश होता। यहां तक कि अधिकारियों द्वारा बचाने का हरसंभव प्रयास विफल होने की अंतिम संभावना समाप्त नहीं होती।

जी हां ! यहां हम चर्चा कर रहे हैं जिले के रजौली प्रखंड अमांवा पश्चिमी पंचायत पीडीएस विक्रेता योगेन्द्र पासवान का। अपने भाई राजेन्द्र पासवान की अनुज्ञप्ति संख्या 70/85 को नाबालिग रहते हुए अधिकारियों की मिलीभगत से न केवल अभिलेख का गायब कराया बल्कि वर्षों तक आंखों में धूल झोंककर खाद्यान्न का उठाव करता रहा।
फर्जीवाड़े की भनक लगते ही आरटीआई कार्यकर्ता प्रणव कुमार चर्चिल सक्रिय हुए और उन्होंने इसके विरुद्ध न केवल जंग छेड़ दिया बल्कि अधिकारियों को बचाने की हर मंशा को अंतिम दम तक विरोध करते हुए मामला राज्य खाद्य आपूर्ति सचिव तक पहुंचायी जिसकी अंतिम सुनवाई लम्बित है।
उक्त मामले में डीएम को कार्रवाई कर अंतिम प्रतिवेदन की मांग राज्य खाद्य सुरक्षा सचिव में मांगी है। चूंकि कार्रवाई अनुज्ञप्ति पदाधिकारी यानी रजौली एसडीएम को करनी है सो उन्होंने इससे संबंधित पत्र रजौली एसडीएम को उपलब्ध कराया है। तकरीबन दो महीने से अधिक का समय व्यतीत होने के बावजूद रजौली एसडीएम द्वारा जानबूझकर कार्रवाई को अबतक लम्बित रखा जा रहा है।

उठ रहा सवाल:- रजौली एसडीएम ने अपने ज्ञापांक 331 दिनांक 20/08/26 को योगेन्द्र पासवान को पत्र भेजकर तीन दिनों के अंदर स्पष्टीकरण की मांग की। उन्होंने स्पष्टीकरण का कोई जवाब नहीं दिया। कारण स्पष्ट है उनके पास दस्तावेजी सबूत व त्रिसदस्यीय जांच कमिटी के प्रतिवेदन के विरुद्ध कोई जवाब ही नहीं है।
अब एसडीएम का मंशा देखिए:- काफी लम्बे अंतराल के बाद ताकि सितंबर माह का खाद्यान्न का उठाव फर्जी अनुज्ञप्तिधारी द्वारा आराम से उठाव कराये जा सके उन्होंने खाद्यान्न उठाव के बाद ज्ञापांक 342 गो. दिनांक 08/09/26 भेजकर दुबारा स्पष्टीकरण की मांग की। स्पष्टीकरण का जबाब तीन दिनों के अंदर देना है पन्द्रह दिनों की अवधि समाप्त होने को है बावजूद कार्रवाई शून्य है।

अब इसे आप क्या कहेंगे? यही न आप भी हद हैं एसडीएम साहब ! आखिर बकरे की मां, कबतक खैर मनाएगी? आज नहीं तो कल कार्रवाई तो करनी ही है, लेकिन आपकी मंशा जग जाहिर हो ही रही है। आप इतना…… किसी को अंदाजा नहीं था। ऐसे में आपसे अन्य मामले में अनुमंडल के नागरिक न्याय की उम्मीद कैसे करेंगे? अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या सिरदला प्रखंड अमोखरी पीडीएस विक्रेता विरेन्द्र सिंह की अनुज्ञप्ति रद्द करने के मामले में आपने इतना विलम्ब किया था क्या? वह भी तो आरटीआई का ही मामला था।
भईया जी की रिपोर्ट
