– शिवपुर जलाशय में पानी में उतरकर जताया विरोध, चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
नवादा : जिले के विभिन्न जलाशयों की प्रस्तावित खुली डाक व्यवस्था के विरोध में कौआकोल प्रखंड स्थित शिवपुर जलाशय में मछुआरों ने पानी में उतरकर शांतिपूर्ण जल सत्याग्रह किया। बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन में स्थानीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के प्रतिनिधियों, परंपरागत मछुआरों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। मछुआरों ने जलाशयों की बंदोबस्ती खुली डाक के माध्यम से करने का विरोध करते हुए ‘बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम, 2006’ के तहत स्थानीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को प्राथमिकता के आधार पर बंदोबस्ती देने की मांग की। बताया गया कि जिला मत्स्य पदाधिकारी-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा जिले के सात जलाशयों—झंगराही, शिवपुर, पिपरा, रजौली अंचल स्थित भंडरा एवं दिबौर तथा सिरदला अंचल स्थित शैलगढ़ एवं बहुआरा—की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए खुली डाक से बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसकी तिथि 25 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।।
कॉफकेड के पदाधिकारियों का आरोप है कि खुली डाक में ऊंची बोली लगने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर स्थानीय मछुआरा समितियां जलाशयों की बंदोबस्ती लेने में सक्षम नहीं होंगी। इससे बाहरी पूंजीपतियों एवं बिचौलियों का प्रभाव बढ़ सकता है तथा परंपरागत रूप से मत्स्य पालन पर निर्भर हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉफकेड के निदेशक राकेश कुमार ने कहा कि बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम, 2006 की धारा-7 के तहत स्थानीय प्रखंड स्तरीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रावधान की अनदेखी कर जलाशयों की खुली डाक की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
कॉफकेड के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप ने कहा कि जलाशय केवल सरकारी राजस्व प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि हजारों परंपरागत मछुआरा परिवारों की आजीविका का आधार हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में न्यायालय के आदेशों एवं विभागीय निर्देशों में स्थानीय समितियों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। ऐसे में खुली डाक की व्यवस्था सहकारिता की मूल भावना के विपरीत है। कॉफकेड के अध्यक्ष प्रयाग सहनी ने कहा कि यदि नवादा के सातों जलाशयों की प्रस्तावित खुली डाक प्रक्रिया को तत्काल नहीं रोका गया, तो संगठन राज्य के अन्य जिलों में भी चरणबद्ध एवं शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करेगा। उन्होंने सरकार से परंपरागत मछुआरा समुदाय के हितों को ध्यान में रखते हुए बंदोबस्ती प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की। जल सत्याग्रह के बाद कॉफकेड एवं स्थानीय मत्स्यजीवी सहयोग समितियों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं।
ज्ञापन में जिले के सातों जलाशयों की प्रस्तावित खुली डाक प्रक्रिया तत्काल स्थगित करने, बिहार राज्य जलाशय मात्स्यिकी नीति, 2022 के परंपरागत मछुआरों के हितों के प्रतिकूल प्रावधानों को निरस्त करने तथा जलाशयों, जलकरों, तालाबों एवं सदाबहार नदियों की बंदोबस्ती खुली डाक के बजाय बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम, 2006 के तहत स्थानीय समितियों को देने की मांग की गई। इसके अलावा निबंधित मत्स्यजीवी सहयोग समितियों को वार्षिक निर्धारित सुरक्षित जमा राशि पर प्राथमिकता देने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। मौके पर दर्जनों लोग मौजूद थे।
भईया जी की रिपोर्ट
