नवादा : जैन धर्म के सबसे पवित्र और आध्यात्मिक ‘पर्युषण पर्व’ के पांचवें दिन नगर के अस्पताल रोड स्थित ऐतिहासिक जैन मंदिर में भगवान महावीर के जन्म कल्याणक का श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ विधिवत वाचन किया गया। पावन अवसर पर जैन समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान महावीर स्वामी के जन्म से जुड़े प्रेरक व आध्यात्मिक प्रसंगों का श्रवण किया। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय भजनों, धार्मिक जयकारों और आरती से गुंजायमान रहा।

14 स्वप्नों और तीर्थंकर के जन्म के प्रेरक प्रसंगों का हुआ वाचन
जन्म कल्याणक वाचन के दौरान विद्वान वक्ताओं और श्रद्धालुओं ने 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के गर्भ, जन्म और माता त्रिशला द्वारा देखे गए 14 मंगलकारी स्वप्नों से जुड़े प्रसंगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर द्वारा प्रतिपादित पंच महाव्रत—अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन और आचरण में उतारने का दृढ़ संकल्प लिया।
आत्मशुद्धि, संयम और तप का महापर्व है पर्युषण
समारोह में उपस्थित समाज के वरिष्ठ प्रबुद्धजनों ने कहा कि पर्युषण पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, कठोर संयम, त्याग, तपस्या और आत्ममंथन का महापर्व है। भगवान महावीर का संपूर्ण जीवन ‘”जियो और जीने दो’ की भावना पर आधारित रहा है। उनके दिए गए करुणा, क्षमा और अहिंसा के संदेश आज की अशांत दुनिया में मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।
विशेष पूजा-अर्चना के बाद बंटा प्रसाद
जन्म कल्याणक वाचन के उपरांत मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, शांतिधारा और महाआरती संपन्न की गई। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को जन्म कल्याणक की बधाई दी और समाज में आपसी प्रेम, मैत्री और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया। धार्मिक अनुष्ठानों के पश्चात सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर जैन समाज के कई गणमान्य सदस्य व बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

भईया जी की रिपोर्ट
