-27.27 वर्ग किमी जंगल बना वीरान, 20 से 22 जेसीबी मशीनें चीर रहीं जंगल का सीना
नवादा : कभी विश्व पटल पर उच्च गुणवत्ता वाले अभ्रक के लिए विख्यात जिले का रजौली वन प्रक्षेत्र आज अवैध खनन माफियाओं की बेलगाम गतिविधियों से वीरान होता जा रहा है। वन एवं वन्यजीव संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में रजौली प्रखंड क्षेत्र सवैयाटांड़ पंचायत की 27.27 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले शुष्क पर्णपाती वनों को वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया था। इसके साथ ही बिहार राज्य खनिज निगम की सभी आधिकारिक खदानें पूरी तरह बंद कर दी गई थीं। लेकिन सरकारी पाबंदियों के बावजूद अभयारण्य क्षेत्र में माफियाओं का अवैध साम्राज्य बदस्तूर फल-फूल रहा है, जहां नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाकर भारी मशीनों और विस्फोटकों से खनन किया जा रहा है।
रोज 20 से 22 मशीनें चीर रहीं जंगल का सीना
सवैयाटांड़ पंचायत की घने जंगलों में दर्जनों अवैध खदानें दिन-रात बेरोकटोक संचालित हो रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रतिदिन 20 से 22 अर्थमूवर जेसीबी मशीनें और पोकलेन जंगल का सीना चीरने में लगी हैं। शारदा, ललकी, टोपो पहाड़ी, बसरौन, बाराटांड़, कैयवा, सिमरातरी और चटकरी जैसे इलाकों में माफियाओं द्वारा भारी पैमाने पर ढिबरा और व्हाइट स्टोन निकाला जा रहा है। प्रतिदिन दर्जनों शक्तिमान ट्रकों से लाखों रुपये का बेशकीमती अभ्रक झारखंड के कोडरमा और गिरिडीह मंडियों में खपाया जा रहा है। गूगल सैटेलाइट तस्वीरों में भी साफ दिखता है कि घना जंगल अब पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से सपाट मैदान में तब्दील हो चुका है।
अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप, दूरदराज का फायदा
मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण सामान्य पुलिस गश्ती यहां तक नहीं पहुंच पाती है। स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वन विभाग, खनन विभाग व पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से यह सिंडिकेट चल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निचले स्तर से लेकर उपर तक के अधिकारी माफियाओं से बंधी-बंधाई वसूली कर आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं। पिछले वर्ष जब जिला मुख्यालय आई विशेष टीम ने सवैयाटांड़ और चटकरी में छापेमारी कर मशीनें जब्त की थीं, तब स्थानीय वन अधिकारियों को भनक तक नहीं लगने दी गई थी, जो स्थानीय संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
प्राकृतिक आवास उजड़ने से रिहायशी इलाकों में हाथियों का हमला
अभयारण्य में अंधाधुंध कटाई और बारूदी धमाकों ने वन्यजीवों के प्राकृतिक पर्यावास को पूरी तरह तबाह कर दिया है। हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर और भोजन के स्रोत नष्ट होने के कारण जंगली हाथियों के झुंड अब रिहायशी गांवों और कस्बों की तरफ रुख कर रहे हैं। रजौली और आसपास के इलाकों में हाथियों के हमले से पिछले दिनों कई ग्रामीणों की जानें जा चुकी है और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार अधिकांश खदानों की लीज वर्ष 2004 में ही समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद से यह इलाका पूरी तरह माफियाओं के चंगुल में है।
मासूमों से खतरनाक मजदूरी, मौतों को दबाने का खेल
अवैध कारोबार का सबसे काला पहलू मासूम बच्चों से कराई जाने वाली जानलेवा मजदूरी है। गरीबी और मजबूरी के चलते सैकड़ों बच्चे स्कूल जाने की उम्र में खदानों से ढिबरा बीनने और जान जोखिम में डालने को विवश हैं। गहरी खदानों में चाल धंसने से आए दिन मजदूरों और बच्चों की दबकर दर्दनाक मौतें होती हैं, लेकिन माफिया परिजनों को डरा-धमकाकर या मामूली रकम थमाकर शवों को बिना पोस्टमार्टम के गायब करवा देते हैं। इस बावत में जिला वन पदाधिकारी श्रेष्ठ कृष्ण ने बताया कि वनकर्मी लगातार गश्ती कर रहे हैं। खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के लिए एक विशेष टीम का गठन जल्द किया जायेगा।
भईया जी की रिपोर्ट
