– कभी भी हो सकती है अप्रीय घटना
नवादा : जिले के ऐतिहासिक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल शीतल ककोलत जलप्रपात में अचानक अव्यवहारिक रुप में की गई प्रवेश व पार्किंग शुल्क वृद्धि को लेकर सैलानियों, दुकानदारों और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ऐसे में कभी भी अप्रीय घटना हो जाय तो कोई आश्चर्य नहीं। 20 मई 2026 को प्रशासन द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद से जहां दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों में नाराजगी बढ़ी है, वहीं स्थानीय दुकानदार और ग्रामीण भी इस निर्णय का खुलकर विरोध करने लगे हैं।
क्या है मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शीतल जलप्रपात में प्रवेश व वाहन पार्किंग शुल्क में भारी बढ़ोतरी की गई है। पहले सोमवार से शुक्रवार तक प्रति व्यक्ति ₹10 शुल्क लिया जाता था जिसे बढ़ाकर ₹100 कर दिया गया है। वहीं शनिवार और रविवार को ₹20 की जगह अब ₹200 शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा वाहन पार्किंग शुल्क में भी वृद्धि की गई है। अब बाइक के लिए ₹100, थ्री-व्हीलर के लिए ₹150 तथा फोर-व्हीलर के लिए ₹200 शुल्क तय किया गया है।
राशि दोगुनी वसूली करने से नाराज हैं स्थानीय लोग और दुकानदार
शनिवार और रविवार को यह राशि दोगुनी वसूली जाएगी, जिससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इस फैसले के बाद महिला, पुरुष और बच्चों सहित हर वर्ग के पर्यटकों में असंतोष देखा जा रहा है। पटना, गया, नवादा और भागलपुर समेत विभिन्न जिलों से आए सैलानियों का कहना है कि इतनी अधिक शुल्क वृद्धि अचानक लागू करना पूरी तरह अनुचित है। उनका मानना है कि इससे पर्यटन पर नकारात्मक असर पड़ेगा और लोग यहां आने से कतराने लगेंगे।
वहीं, जलप्रपात के आसपास अपनी रोजी-रोटी चलाने वाले स्थानीय दुकानदारों दिलीप, महेश, रमेशरी देवी समेत दर्जनों व्यवसायियों ने भी चिंता जताते हुए कहा कि पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही है जिससे उनके व्यवसाय पर सीधा असर पड़ रहा है। दुकानदारों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो छोटे कारोबारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
भारी शुल्क वृद्धि से आम जनता और छोटे व्यवसायियों को हो रहा नुकसान
बताया जाता है कि यह निर्णय 23 मई 2026 10:00 AM जिलाधिकारी रवि प्रकाश, पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमान और डीएफओ श्रेष्ठ रंजन द्वारा संयुक्त रूप से लिया गया है। हालांकि, फैसले के बाद से स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। ग्रामीणों और पर्यटकों का कहना है कि पर्यटन स्थल पर इस तरह की भारी शुल्क वृद्धि से आम जनता और छोटे व्यवसायियों को नुकसान हो रहा है। शुल्क वृद्धि के पहले शनिवार को आने वाले सैलानियों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से भारी कमी देखी गयी। फिलहाल, ककोलत जलप्रपात में घटती भीड़ और बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई है।
भईया जी की रिपोर्ट